Diwali 2020: इसलिए लक्ष्मी पूजा में गन्ना है जरूरी, जानें क्या है इससे जुड़ी कथा
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दिवाली 14 नवंबर को है। यह त्योहार कार्तिक माह की अमावस्या तिथि को मनाया जाता है। इस दिन लक्ष्मीजी की पूजा का विशेष महत्व होता है। लक्ष्मी पूजन से घर पर धन और सुख-समृद्धि आती है। इस पूजा में कई तरह की पूजन सामग्रियों का प्रयोग किया जाता है। जिसमें गन्ने का विशेष महत्व होता है। मां लक्ष्मी की पूजा में गन्ने के प्रयोग के पीछे एक रोचक कथा है।
पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान विष्णु माता लक्ष्मी संग पृथ्वी पर विचरण कर रहे थे। तभी अचानक विष्णुजी को कुछ याद आया। फिर उन्होंने माता लक्ष्मी से कहा कि मैं दक्षिण की तरफ जा रहा हूं, तुम यहीं पर रुककर मेरी प्रतिक्षा करना। यह बात कहकर विष्णुजी चले गए। माता लक्ष्मी थोड़े समय उस स्थान पर रुककर भगवान विष्णु की प्रतिक्षा करने लगी। लेकिन स्वभाव से चंचला होने के कारण वे कहां एक स्थान पर रुकने वाली थीं।
इस गलती के लिए सजा के तौर पर उन्होंने कहा कि तुम्हे इस किसान के घर 12 वर्षो तक रहना पड़ेगा और उसकी देखभाल करनी पड़ेगी। यह बात कहकर विष्णु जी वैकुंठ लौट गए और माता लक्ष्मी किसान के घर रहने लगीं। लक्ष्मीजी की कृपा से वह किसान थोडे ही दिनों में बहुत ही धनवान और सुखी रहने लगा।
12 वर्ष बीत जाने के बाद जब भगवान विष्णु माता लक्ष्मी को बुलाने आए तो उस किसान ने उन्हें जाने से रोका। तब भगवान विष्णु ने उसे वर दिया कि लक्ष्मी जी के जाने के बाद वह अदृश्य होकर तुम्हारे घर पर निवास करेंगी। अगर तुम अपने घर में दीपक जलाओगे और मेरी पूजा करोगे तो मेरा वास हमेशा तुम्हारे घर पर होगा। तभी से लक्ष्मी पूजा में उनका प्रिय गन्ना रखा जाने लगा।
महालक्ष्मी का एक रूप गजलक्ष्मी भी है। ऐसे में लक्ष्मी के ऐरावत हाथी की प्रिय खाद्य-सामग्री ईख यानी गन्ना है। दिवाली के दिन पूजा में गन्ना रखने से ऐरावत प्रसन्न रहते हैं और ऐरावत की प्रसन्नता से महालक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं। पूजा पूरी होने पर प्रसाद के रूप में गन्ने का सेवन भी किया जाता है।