Chhath 2022: छठ पूजा में नाक तक सिंदूर लगाती हैं महिलाएं, जानें क्या है इसकी वजह
नाक तक सिंदूर लगाने का महत्व
छठ पर्व के दौरान महिलाएं नाक तक लंबा सिंदूर लगाती हैं। छठ पूजा में लंबा सिंदूर लगाने के पीछे भी एक मान्यता है। इस मान्यता के अनुसार जो महिला सिंदूर बालों में छुपा लेती है उनका पति समाज में छुप जाता है और तरक्की नहीं कर पाता और साथ ही वह अल्पायु भी होता है। इसी कारण छठ के दौरान महिलाएं लंबा सिंदूर लगाती हैं उनके पति की आयु के साथ सम्मान भी समाज में बढ़े।
छठ पूजा के दौरान 3 प्रकार के सिंदूर का प्रयोग
छठ पूजा के दौरान 3 तरह के सिंदूर का इस्तेमाल किया जाता है।
सुर्ख लाल सिंदूर: लाल रंग का सिंदूर मां पार्वती और सती की उर्जा का प्रतीक होता है और लाल रंग का सिंदूर लगाने से पति की आयु लंबी होती है इसलिए आमतौर पर महिलाएं छठ पूजा पर लाल रंग के सिंदूर का इस्तेमाल करती है।
पीला या नारंगी सिंदूर: छठ पूजा के दौरान कुछ महिलाएं पीले या नारंगी रंग के सिंदूर को माथे से लेकर नाक तक सजाकर पूजा करती हैं। छठ पूजा के दौरान जो भी महिला ने व्रत रखा होता है वो इस सिंदूर से दूसरी शादीशुदा महिला की मांग को भी सजाती है। कहा जाता है की इस सिंदूर से छठी मैया और भगवान सूर्य का आशीर्वाद मिलता है और पति का सम्मान बढ़ता है।
मटिया सिंदूर: इस सिंदूर का प्रयोग विशेष रूप से बिहार में किया जाता है। यह सबसे शुद्ध सिंदूर के तौर पर माना जाता है। ये सिंदूर एकदम मिट्टी की क्वालिटी का होता है जिसकी वजह से इसे मटिया सिंदूर कहा जाता है। छठ पूजा के दौरान पूजा में चढ़ाने के लिए खासतौर पर इस सिंदूर का प्रयोग किया जाता है,
सिंदूर लगाने का नियम
हिंदू धर्म में सिंदूर का विशेष महत्व है। इसीलिए सिंदूर को हमेशा नियाम के अनुसार लगाना चाहिए। आइए जानते हैं सिंदूर लगाने के नियम-
- नहाने के बाद सबसे पहले सिंदूर लगाना चाहिए।
- सुहागिन महिलाओं को कभी भी खाली मांग नहीं रखना चाहिए।
- मान्यता है कि महिलाएं जितना लंबा सिंदूर लगाएंगी पति की आयु भी उतनी ही लंबी होगी।
- यही कारण है महिलाएं छठ एवं अन्य तीज त्योहार पर लंबा सिंदूर लगाती हैं।
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