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Chaturmas 2025: इस वर्ष कब शुरू होगा चातुर्मास? जानें तिथि, महत्व और पौराणिक कथाएं

Wed, 04 Jun 2025 02:21 PM IST
शिखर बरनवाल ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: शिखर बरनवाल Updated Wed, 04 Jun 2025 02:21 PM IST
सार

चातुर्मास 2025 की शुरुआत 6 जुलाई से हो रही है और ये 1 नवंबर 2025 तक चलेगा। इस दौरान कुछ नियमों का पालन करना शुभ होता है। आइए इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

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Chaturmas 2025 Start Date Puja Tithi Rituals and Spiritual Stories Chaturmas Kab Se Suru Hai
भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock

Chaturmas 2025: सनातन धर्म में चातुर्मास का विशेष महत्व है, जो आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, यानी देवशयनी एकादशी से शुरू होता है। इस वर्ष चातुर्मास 6 जुलाई 2025 से प्रारंभ होगा और 1 नवंबर 2025 को देवउठनी एकादशी के साथ समाप्त होगा।



यह चार महीने की अवधि हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र मानी जाती है, क्योंकि इस दौरान भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं। मान्यता है कि भगवान के शयनकाल के कारण इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश और अन्य बड़े मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। हालांकि, यह समय आध्यात्मिक साधना, तपस्या, दान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। भक्तगण इस दौरान भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहते हैं, कथाएं सुनते हैं और सात्विक जिवन यापन करते हैं। 

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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock

चातुर्मास 2025 तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 5 जुलाई को शाम 6:58 बजे शुरू होगी, जो 6 जुलाई को रात 9:14 पर समाप्त होगी। इस अवधि में भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में चले जाते हैं, और सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। यह समय भक्ति, साधना और आत्मशुद्धि के लिए विशेष माना जाता है।


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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock

चातुर्मास का धार्मिक महत्व
चातुर्मास सावन, भाद्रपद, आश्विन और कार्तिक माह को मिलाकर चार महीनों की अवधि है। इस दौरान मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन और उपनयन संस्कार वर्जित हैं, क्योंकि भगवान विष्णु की शुभ ऊर्जा शयनकाल में कम हो जाती है। इस दौरान पूजा-पाठ का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान सात्विक जीवन जीना चाहिए। भगवान शिव और विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम और शिव चालीसा का पाठ करना शुभ माना जाता है।


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भगवान शिव - फोटो : freepik

पौराणिक कथा
चातुर्मास से जुड़ी एक प्रमुख पौराणिक कथा राजा बलि और भगवान विष्णु के वामन अवतार से संबंधित है। स्कंद पुराण और श्रीमद्भागवत पुराण के अनुसार, राजा बलि ने भगवान विष्णु की भक्ति में तीन पग भूमि दान देने का वचन दिया। वामन रूप में भगवान विष्णु ने दो पगों में पृथ्वी और आकाश नाप लिया और तीसरा पग बलि के सिर पर रखा। प्रसन्न होकर विष्णु ने बलि को पाताल लोक में निवास और चातुर्मास में उनके साथ रहने का वरदान दिया। इसीलिए देवशयनी एकादशी से भगवान विष्णु योग निद्रा में चले जाते हैं, और सृष्टि का कार्यभार भगवान शिव को सौंपते हैं।


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भगवान विष्णु - फोटो : Adobe Stock
क्या करें और क्या न करें?
चातुर्मास में सुबह जल्दी उठकर सूर्य को अर्घ्य देना, भगवान विष्णु और शिव की पूजा करना, और सात्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए। तामसिक भोजन, जैसे लहसुन, प्याज और मांस, से परहेज करें। काले वस्त्र न पहनें; लाल, पीला या हरा रंग शुभ है। झूठ, निंदा और विवाद से बचें। बिस्तर पर सोने के बजाय जमीन पर शयन करें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये खबर लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस खबर में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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