हिंदू कैलेंडर (पंचांग) के अनुसार हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है। पौष के महीने में त्रयोदशी तिथि बुधवार, 08 जनवरी को है। वार के अनुसार हर प्रदोष व्रत का अपना अलग महत्व होता है। इस बार प्रदोष व्रत बुधवार के दिन है जिस वजह से इसे बुध प्रदोष व्रत कहते हैं। इस तिथि पर भगवान शिव की पूजा करने का विधान है।
{"_id":"5e1475538ebc3e87ba645525","slug":"budh-pradosh-vrat-2020-date-time-significance-importance-and-shubh-muhrat","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"Budh Pradosh Vrat 2020: साल का पहला प्रदोष व्रत 8 जनवरी को जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व","category":{"title":"Festivals","title_hn":"त्योहार","slug":"festivals"}}
Budh Pradosh Vrat 2020: साल का पहला प्रदोष व्रत 8 जनवरी को जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व
Wed, 08 Jan 2020 09:11 AM IST
योगेश जोशी
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: योगेश जोशी
Updated Wed, 08 Jan 2020 09:11 AM IST
विज्ञापन
हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुध प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं
बुध प्रदोष व्रत के लाभ
- बुध प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा से सभी तरह के कष्ट दूर हो जाते हैं। यह व्रत सभी मनोकामनाएं को पूर्ण करने वाला है। भोले शंकर की कृपा से व्यक्ति के जीवन से सभी तरह के कष्ट और संकटों का निवारण हो जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार बुधवार का दिन भगवान गणेश का होता है, इस तिथि पर उनके पिताजी भगवान शिव की पूजा करने से गणपति भी खुश होते हैं और अपना आशीर्वाद देते हैं।
प्रदोष व्रत पूजा विधि
- प्रदोष व्रत के दिन सुबह स्नान आदि से निवृत होने के बाद शिव जी को ध्यान करके व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
- इस व्रत में शुभ मुहूर्त में भगवान शिव की विधि विधान से पूजा करें।
- अगर संभव हो तो प्रदोष व्रत में दिन भर निराहार रहें। अगर आप निराहार नहीं रह सकते हैं तो आप फल का सेवन कर सकते हैं।
- पूजा के समय उत्तर या पूर्व की दिशा में मुंह होना चाहिए।
- भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक करें और अपनी इच्छानुसार पुष्प, अक्षत्, भांग, धतूरा, सफेद चंदन, गाय का दूध, धूप आदि अर्पित करें।
- इस दिन ऊं नम: शिवाय: मंत्र का जाप अवश्य करें।
- भोले शंकर को इच्छानुसार भोग लगाएं और बाद में उसे प्रसाद के रूप में बांट दें।
विज्ञापन
विज्ञापन
बुध प्रदोष व्रत मुहूर्त
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ
त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ
- 08 जनवरी को सुबह 04:14 बजे से होगा, जो 09 जनवरी को तड़के 03:43 बजे तक रहेगा।
- प्रदोष व्रत पूजा का मुहूर्त दो घंटे 40 मिनट तक है। इसका प्रारंभ शाम को 05:17 बजे से शाम 07:57 बजे तक है।