फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Pradosh Vrat 2024: रवि प्रदोष व्रत कब है ? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Thu, 12 Sep 2024 01:35 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: मेघा कुमारी Updated Thu, 12 Sep 2024 01:35 PM IST
विज्ञापन
Bhadrapad Pradosh Vrat 2024 date and shubh muhurat know pradosh puja vidhi
Bhadrapad Pradosh Vrat - फोटो : अमर उजाला

September Pradosh Vrat 2024: हर माह में आने वाले प्रदोष व्रत का अपना विशेष महत्व होता है। लेकिन भादों महीने में इसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार भादों माह गौरी पुत्र गणेश की पूजा को समर्पित होता है। ऐसे में महादेव और माता पार्वती की पूजा करना और भी लाभकारी होता है। इस तिथि पर शिव-पार्वती की आराधना करने से भक्तों के समस्त संकट दूर होते हैं।



इस दौरान व्रत रखने से वैवाहिक जीवन में खुशहाली बनी रहती है। साथ ही धन लाभ के योग का निर्माण होता है। वहीं इस साल भादों माह के शुक्ल पक्ष में प्रदोष व्रत 15 सितंबर 2024 को रखा जाएगा। इस दिन रविवार होने के कारण ये रवि प्रदोष व्रत होगा। इस तिथि पर कई मंगलकारी योग का निर्माण हो रहा है, जो पूजा के लिए बेहद शुभ है। ऐसे में आइए रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि को जानते हैं।

Bhadrapad Pradosh Vrat 2024 date and shubh muhurat know pradosh puja vidhi
Bhadrapad Pradosh Vrat - फोटो : freepik

रवि प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त
प्रदोष व्रत की पूजा प्रदोष काल में की जाती है। पंचांग के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत पर पूजा का शुभ समय संध्याकाल 6 बजकर 26 मिनट से लेकर रात के 8 बजकर 46 मिनट तक रहेगा। इस दौरान आप महादेव और माता पार्वती की पूजा कर सकते हैं।

Bhadrapad Pradosh Vrat 2024 date and shubh muhurat know pradosh puja vidhi
Bhadrapad Pradosh Vrat - फोटो : istock

प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा संपूर्ण विधि से करनी चाहिए। इससे महादेव प्रसन्न होते हैं। पूजा के लिए सबसे पहले सुबह ही स्नान कर लेना चाहिए। फिर साफ वस्त्रों को धारण करें।
  • अब आप शिव-पार्वती की पूजा करें, और व्रत का संकल्प लें। 
  • शाम को पूजा करने के लिए पूजा स्थल पर सभी सामग्रियों को एकत्रित कर लें। फिर एक चौकी लगाएं। उसपर साफ वस्त्र बिछाकर शिव-पार्वती की मूर्ति को स्थापित करें।
  • इसके बाद शिवलिंग पर शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करें।
  • अब शिव जी को फूल, बेलपत्र और भांग चढ़ाएं। वहीं माता पार्वती को फूल अर्पित करें। 
  • इसके बाद महादेव का नाम लेते हुए दीया जलाएं और आरती करें।
  • इस दौरान शिव चालीसा का पाठ करना चाहिए, इससे शुभ फलों की प्राप्ति होती हैं।
  • अंत में आप शिव जी को मिठाई का भोग लगाएं।
विज्ञापन
विज्ञापन
Bhadrapad Pradosh Vrat 2024 date and shubh muhurat know pradosh puja vidhi
Bhadrapad Pradosh Vrat - फोटो : freepik

प्रदोष व्रत का महत्व
हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत को महादेव की पूजा के लिए बेहद लाभदायक माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से जातक को ऐश्वर्य और धन की प्राप्ति होती हैं। इस दौरान शिव-पार्वती की जोड़ी का पूजन करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। साथ ही सभी समस्याओं का निवारण होता है। 

विज्ञापन
Bhadrapad Pradosh Vrat 2024 date and shubh muhurat know pradosh puja vidhi
Bhadrapad Pradosh Vrat - फोटो : freepik

शिव जी की आरती 
ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।
 
मां पार्वती की आरती 
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता.
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता..
जय पार्वती माता...
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता.
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता.
जय पार्वती माता...
सिंह को वाहन साजे कुंडल है साथा.
देव वधु जहं गावत नृत्य कर ताथा..
जय पार्वती माता...
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सती कहलाता.
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता..
जय पार्वती माता...
शुम्भ-निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता.
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाथा..
जय पार्वती माता...
सृष्टि रूप तुही जननी शिव संग रंगराता.
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मदमाता.
जय पार्वती माता...
देवन अरज करत हम चित को लाता.
गावत दे दे ताली मन में रंगराता..
जय पार्वती माता...
श्री प्रताप आरती मैया की जो कोई गाता.
सदा सुखी रहता सुख संपति पाता..
जय पार्वती माता...।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
 

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed