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Bakrid 2025: बकरीद आज, जानें ईद-उल-अजहा का महत्व और इतिहास

Sat, 07 Jun 2025 07:06 AM IST
ज्योति मेहरा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ज्योति मेहरा Updated Sat, 07 Jun 2025 07:06 AM IST
सार

Why Bakrid Is Celebrated: बकरीद इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व हज यात्रा के समापन पर मनाया जाता है, जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। 

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Bakrid 2025 celebrated on june 7 know why eid ul adha is celebrated
Bakrid 2025 Mein Kab Hai - फोटो : adobe stock

Bakrid 2025 Mein Kab Hai: बकरीद को ईद-उल-अजहा या कुर्बानी की ईद के नाम से भी जाना जाता है। यह इस्लाम धर्म के सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक है। यह पर्व हज यात्रा के समापन पर मनाया जाता है, जो इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। बकरीद हमें सिखाती है कि सच्चा धर्म वही है जिसमें त्याग, सच्चाई और इंसानियत की भावना हो। इस दिन मुसलमान कुर्बानी की रस्म निभाकर उस ऐतिहासिक घटना की याद करते हैं जब पैगंबर इब्राहीम ने अल्लाह की आज्ञा पर अपने बेटे की कुर्बानी देने की तैयारी की थी। यह त्योहार हमें यह संदेश देता है कि अल्लाह की राह में खुद को समर्पित कर देना ही सच्ची भक्ति है।

 

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Bakrid 2025: अल्लाह के प्रति त्याग और समर्पण का पर्व है बकरीद, इस्लाम में है कुर्बानी और बलिदान का महत्व

Bakrid 2025 celebrated on june 7 know why eid ul adha is celebrated
बकरीद 2025 में कब मनाई जाएगी? - फोटो : adobe stock

बकरीद 2025 में कब मनाई जाएगी?
इस्लामी कैलेंडर चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होता है, इसलिए त्योहारों की तिथियां हर साल बदलती रहती हैं। इस बार सऊदी अरब में 27 मई को जिल-हिज्जा का चांद दिखाई दिया, जिसके अनुसार वहां बकरीद 6 जून को मनाई जा रही है। भारत में यह पर्व 7 जून, शनिवार को मनाया जाएगा। यह दिन इस्लामी महीने जिल-हिज्जा की 10वीं तारीख को आता है, जिसे हज का अंतिम और सबसे पुण्यदायक दिन माना जाता है।

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बकरीद का इतिहास - फोटो : adobe stock

बकरीद का इतिहास
बकरीद का मूल भाव पैगंबर इब्राहिम की उस परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने प्रिय पुत्र इस्माईल (अलैहिस्सलाम) की कुर्बानी देने का निश्चय किया था। पौराणिक मान्यता के अनुसार पैगंबर इब्राहीम को एक रात सपना आया, जिसमें उन्हें अपने सबसे प्यारे बेटे की कुर्बानी देने को कहा गया। 

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बकरीद का इतिहास - फोटो : Adobe

उन्होंने इसे अल्लाह की आज्ञा मानकर पालन किया और अपने बेटे को लेकर कुर्बानी के लिए निकल पड़े। जब उन्होंने बेटे की आंखों पर पट्टी बांधी और बलिदान देने लगे, तब अल्लाह ने उनकी परीक्षा को सफल मानते हुए इस्माइल को बचा लिया और उसकी जगह एक मेंढ़ा (भेड़) भेज दिया। यह घटना इस बात का प्रतीक है कि सच्चे दिल से की गई भक्ति और समर्पण को अल्लाह स्वीकार करता है।

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बकरीद का महत्व - फोटो : adobe stock

बकरीद का महत्व
बकरीद केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि यह आत्म-त्याग, सच्चे इरादों और इंसानियत की शिक्षा देने वाला पर्व है। यह त्योहार हमें याद दिलाता है कि अल्लाह पर विश्वास बनाए रखते हुए दूसरों की मदद करना और अपने स्वार्थ को त्यागना ही असली धर्म है।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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