महाभारत में कथा है कि जुए में सब कुछ हार जाने के बाद पांडवों को अपना राज पाट गवांकर वन-वन भटकना पड़ा। ऐसे समय में भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर को बताया कि आप सभी भाई मिलकर भाद्र शुक्ल चतुर्दशी तिथि का व्रत करें। इस व्रत से अनंत भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इसी व्रत से आपको पुनः राजलक्ष्मी की प्राप्ति होगी और आपको आपका खोया हुआ राज पाट मिलेगा।
इस व्रत से पांडव हुए थे धनवान, आप भी करें लक्ष्मी होगी आप पर मेहरबान
यह पुण्यदायी व्रत इस वर्ष 15 सितंबर को है। भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा है कि जो इस कल्याणकारी व्रत को रखता है और अनंत भगवान की पूजा करके अनंतसूत्र को अपने बाजू में धारण करता है उसके सारे कष्ट और संकट अनंत भगवान दूर कर देते हैं।
इस व्रत से पांडव हुए थे धनवान, आप भी करें लक्ष्मी होगी आप पर मेहरबान
शास्त्रों में बताया गया है कि अनंत चतुर्दशी के पूजन में व्रत रखने वाले को सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प करना चाहिए। इसके बाद पूजा घर में कलश स्थापित करके कलश पर भगवान विष्णु का चित्र स्थापित करें। इसके बाद कच्चा धागा लें जिस पर चौदह गांठें लगाएं इस प्रकार अनन्तसूत्र तैयार हो जाने पर इसे भगवान के पास रखें। अंनत सूत्र बाजार में भी तैयार किया मिलता है आप चाहें तो इनका भी प्रयोग कर सकते हैं। जब यह तैयारी हो जाए तब भगवान विष्णु के साथ अनंतसूत्र की षोडशोपचार-विधि से पूजन करें।
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इसके बाद ॐ अनन्तायनम: मंत्र का जप करते हुए अनंत भगवान की पूजा करनी चाहिए। पूजन के बाद पुरुषों को अनंत सूत्र दाएं बाजू में और महिलाओं को बाएं बाजू में बांधना चाहिए।
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शास्त्रों में अनंत चतुर्दशी की जो कथा मिलती है उसके अनुसार सतयुग में सुमन्तुनाम के एक मुनि थे। सुमन्तु मुनि ने अपनी कन्या शीला का विवाह कौण्डिन्य नामक मुनि से किया। शीला अनन्त-व्रत का पालन किया करती थी। विवाह के बाद भी वह इस निमय का पालन करती रही और वह अनंत भगवान का पूजन करती है और अनन्तसूत्र बांधती रही।