‘हिंदी हैं हम’ अभियान में लोगों में किस तरह से हिंदी के प्रति प्रेम और आकर्षण बनाया जा सकता है। इसे लेकर जिले के रंगकर्मी भी आगे आए हैं। रंगकर्मियों का कहना है कि हिंदी देश की राष्ट्रभाषा है फिर भी हिंदी क्षेत्रों में यह अपनी पैठ नहीं जमा पा रही है। हिंदी भाषा को प्रोत्साहित करने और उसे जनमानस तक पहुंचाने के लिए नाटक से बड़ा कोई माध्यम नहीं हो सकता है। इस दिशा में कार्य करने की जरूरत है।
‘हिंदी हैं हम’ अभियान: नाटकों से बढ़ सकता है हिंदी का आधार
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गैर हिंदी भाषा क्षेत्रों में मिले महत्व
हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है, इसे गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी बढ़ावा मिलना चाहिए। यह तभी संभव है जब सरकारी और गैर सरकारी संस्थाएं कामकाज में इसका व्यापक इस्तेमाल करें। नाटकों के जरिये हिंदी के प्रति लोगों को आकर्षित किया जा सकता है। नाटक ही एकमात्र ऐसा साधन है जो लोगों से सीधा संवाद कर सकता है। - नासिर यूसुफजई, वरिष्ठ रंगकर्मी
अभियान को लोगों तक पहुंचा सकता है नाटक
नाटक देखने की विधा है जो अन्य विधाओं से काफी प्रभावी और उपयोगी है। किसी भी अभियान को जनमानस तक पहुंचाने के लिए नाटक से बड़ा माध्यम कोई और नहीं है। हिंदी भाषा को लोगों तक पहुंचाने और कामकाज मेें इसका उपयोग बढ़ाने के लिए नाटकों के जरिये जागरूकता लाई जानी चाहिए।-तनुज शर्मा, युवा रंगकर्मी।
मंचन पर दिया जाए अधिक ध्यान
नाटक ही ऐसा माध्यम है जो लोगों को हिंदी के प्रति आकर्षित कर सकता है। प्रदेश में हिंदी में अच्छे नाटकों का लेखन और निर्देशन कम हो रहा है। जिनका मंचन हो भी रहा है, वह भी आमजन से दूर है। ऐसे में हिंदी नाटकों का गांव स्तर पर मंचन हो तो लोग हिंदी के प्रति आकर्षित हो सकते हैं। -प्रीति रावत, युवा रंगकर्मी।
हवा में नहीं धरातल पर करना होगा कार्य
हिंदी भाषा को लोगों तक पहुंचाने के लिए उसी तरह नाटकों का सहारा लेना चाहिए। जिस तरह हम सरकारी योजनाओं को लोगों तक पहुंचाने के लिए लेते हैं। इसके लिए विशेष बजट का प्रावधान हो। कलाकारों को उचित मानदेय मिले। हवा में बातें करने की बजाय धरातल पर कार्य हो। - ईशान यूसुफजई, वरिष्ठ रंगकर्मी।