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Wedding Cards: राजस्थान में यहां नहीं छपते शादी के कार्ड, रिश्तेदारों को न्योता देने का कुछ ऐसा है रिवाज

Tue, 21 Jan 2025 05:59 PM IST
अरविंद कुमार न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, जैसलमेर Published by: अरविंद कुमार Updated Tue, 21 Jan 2025 05:59 PM IST
सार

राजस्थान में जैसलमेर जिले को स्वर्ण नगरी के नाम से जाना जाता है। यहां की दीवारें एक अनोखी परंपरा के कारण इस वक्त चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

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Rajasthan wedding cards are not printed invitations to relatives are made by painting on walls
शादी कार्ड - फोटो : अमर उजाला

इंटरनेट एवं मोबाइल क्रांति के जमाने में सरहदी जैसलमेर में वैवाहिक प्रस्ताव में आमंत्रित करने के लिए घर की दीवारों पर मांडणा और अनूठी चित्र शैली की बरसों पुराना पारंपरिक रिवाज आज भी चर्चा का विषय बना हुआ है। राजस्थानी चित्र शैली के सिद्धहस्त चित्रकारों की तूलिका से उकेरे जाने वाले भगवान गणेश जी, रिद्धि-सिद्धि और विभिन्न देवी-देवताओं के चित्र और इसके साथ विवाह समारोह में मेहमानों को आमंत्रित करने के शब्द सहसा ही आसपास से गुजरने वाले लोगों को एकबारगी कदमताल थामने को मजबूर कर देते हैं। 

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शादी कार्ड - फोटो : अमर उजाला

न कुंकुमपत्री और न डिजिटल कॉर्ड बस अड़ोसी-पड़ोसियों, रिश्तेदारों और मेहमानों के लिए घर की दीवारों पर बनाए जाने वाली कलाकृति ही निमंत्रण का जरिया माना जाता है और इस अनूठी मनुहार से सभी शादी समारोह में खींचे चले आते हैं। जानकारों की मानें तो यह अनूठी परंपरा रियासतकाल से ही चली आ रही है। खासकर जैसलमेर के किला क्षेत्र में बसे सैंकड़ों घरों में एक खास जाति समुदाय में इसका प्रचलन ज्यादा देखा जाता है। हालांकि, घर के मुख्य द्वार की दीवारों पर चित्रात्मक आमंत्रण किसी एक जाति एवं समुदाय तक सीमित नहीं, इसे जैसलमेर के विभिन्न समाजों ने अपनाया और अपने-अपने आराध्य देवता एवं लोक-देवताओं के चित्रों का इस्तेमाल कर इस परंपरा को जीवित रखे हुए हैं।

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शादी कार्ड - फोटो : अमर उजाला

आमजन से लेकर राजदरबार के शासकों तक भी पहुंच जाता था विवाह प्रस्ताव का संदेश
जैसलमेर शहर की जनसंख्या का बड़ा हिस्सा इसके किला परिसर में बने मकानों में निवास करता है। ऐसे में एक जमाने में मुख्य महल में रहने वाले शासकों के शहर भ्रमण के लिए निकलने के मार्ग पर बने मकानों की दीवारों में इस तरह के परंपरागत आमंत्रण के चित्र उकेरकर राजदरबार के प्रतिनिधियों का ध्यान भी घर-घर होने वाले विवाह कार्यक्रमों की तरफ आकर्षित किया जाता था। इस तरह राजदरबार से बकायदा शासक या तो स्वयं या अपने प्रतिनिधियों की मौजूदगी से विवाह समारोह की शोभा बढ़ाते थे।

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शादी कार्ड - फोटो : अमर उजाला
राजस्थानी चित्रशैली को प्रोत्साहित कर रही आमंत्रण की अनूठी परंपरा
वक्त के साथ धीरे-धीरे पहचान खो रही राजस्थानी चित्र शैली को इस परंपर के बहाने प्रोत्साहन मिल रही है। आमंत्रण के चित्रों में केवल देवी-देवता का ही इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है। बल्कि इनके साथ वृक्ष, वन्य जीव एवं प्रकृति के विभिन्न रंगों को इसमें शामिल कर पर्यावपरण संरक्षण का संदेश भी दिया जा रहा है। इसके अलावा राजस्थानी पुरुष, महिलाओं, दुल्हन की डोली, हाथी-घोड़ों की राजशाही सवारियों को भी इसमें उकेरकर राजस्थानी चित्रों से मेहमानों को शादी समारोह में आमंत्रित किया जा रहा है।
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