गणगौर के अवसर पर जयपुर के सिटी पैलेस स्थित जनाना ड्योढ़ी में डिप्टी सीएम दीया कुमारी और प्रिंसेस गौरवी कुमारी ने गणगौर माता की पारंपरिक पूजा-अर्चना की। इसके बाद शाही सवारी को लवाजमे के साथ त्रिपोलिया गेट से निकाला गया, जहां पूर्व महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने भी पूरे रीति-रिवाज के साथ गणगौर माता की पूजा की।
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गणगौर माता की शाही सवारी।
- फोटो : अमर उजाला
इस अवसर पर पूर्व महाराजा सवाई पद्मनाभ सिंह ने सभी को गणगौर की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा- जयपुर की गणगौर और तीज की सवारी वैश्विक स्तर पर प्रसिद्ध है। इस वर्ष भी हमारा यह प्रयास रहा कि उन सभी ऐतिहासिक तत्वों को जोड़कर इस आयोजन को अधिक भव्य बनाया जाए। पर्यटन विभाग के साथ मिलकर हमारा उद्देश्य है कि इस प्राचीन परंपरा को उसी रूप में जीवित रखा जाए, जैसे यह पीढ़ियों से चली आ रही है। इसके साथ ही राजस्थान के उन विशेष अंगों को सामने लाएं, जो इसे विश्व में अद्वितीय बनाते हैं और इन्हें कैसे पुनर्जीवित किया जाए। विशेष रूप से, हमारा लक्ष्य युवाओं को हमारी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना है, ताकि वे इसे समझें और आगे बढ़ाएं।
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गणगौर माता का पूजन करती दीया कुमारी।
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि यह उत्सव प्रत्येक वर्ष सिटी पैलेस जयपुर और राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया जाता है। इस बार भी गणगौर की शोभायात्रा हाथी, ऊंट और घोड़ों के लवाजमे के साथ राजसी ठाठ-बाट में संपन्न हुई। शोभायात्रा के दौरान ड्रोन से पुष्प वर्षा की गई और जगह-जगह गणगौर का भव्य स्वागत किया गया। लोक कलाकारों ने कच्छी घोड़ी, गेर और अन्य पारंपरिक नृत्यों का प्रदर्शन किया। बहरूपिया कलाकारों ने अपनी कला से सैलानियों और स्थानीय लोगों का मन मोह लिया।
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जयपुर में निकली गणगौर माता की शाही सवारी।
- फोटो : अमर उजाला
गणगौर पर्व का महत्व क्या?
गणगौर पर्व माता पार्वती की तपस्या और शिव से पुनर्मिलन का प्रतीक है। लोक मान्यताओं के अनुसार, विवाह के बाद पार्वती होली के अवसर पर अपने मायके आईं और वहां 16 दिनों तक रहीं। इस दौरान उनकी सखियों ने उनके साथ खूब आनंद किया। विदाई के समय पार्वती ने सभी को अखंड सौभाग्य और सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद दिया। इसी प्रसंग को गणगौर उत्सव के रूप में मनाया जाता है। गणगौर केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर भी है। इस उत्सव में युवतियां और विवाहित महिलाएं पूरे 16 दिन तक पार्वती माता की आराधना करती हैं और मंगल गीत गाकर सौभाग्य एवं सुखद दांपत्य जीवन की प्रार्थना करती हैं। जयपुर और उदयपुर जैसे शहरों में गणगौर की शाही सवारी बड़े ही भव्य रूप में निकलती है, जिसे देखने के लिए हजारों श्रद्धालु और पर्यटक उमड़ते हैं।