फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

PICS: 'हम गांव वापिस गए तो वो हमें मार डालेंगे'

Sun, 07 Jun 2015 05:20 PM IST
Updated Sun, 07 Jun 2015 05:20 PM IST
विज्ञापन

PICS: 'हम गांव वापिस गए तो वो हमें मार डालेंगे'

rajasthan dangawas dalit not leaving hospital on terror of jaat's

डांगावास के पास एक सरकारी अस्तपाल में कई लोग 14 मई से भर्ती हैं जिनके हाथ-पैर तोड़ डाले गए थे। डॉक्टर उन्हें छुट्टी दे चुका है, लेकिन वो अपने घरों में जाने को तैयार नहीं। उनके घरों के आगे पुलिस लगी है और माहौल में ख़ौफ़ तारी है. ये डांगावास है, जो लगभग 5,000 लोगों की बस्ती है। पुष्कर से 50 किलोमीटर दूर और मेड़ता शहर से लगा ये गाँव पिछले महीने दलितों की हत्याओं के कारण काफी दिनों तक सुर्ख़ियों में रहा।

PICS: 'हम गांव वापिस गए तो वो हमें मार डालेंगे'

rajasthan dangawas dalit not leaving hospital on terror of jaat's

इस कांड के दो हफ्ते बाद मैं डांगावास पहुंचा. सुबह का समय था। गाँव में एक अजीब तरह की ख़ामोशी छाई हुई थी। यहाँ मातम छाया हुआ था। अधिकतर दुकानें बंद थीं। लोग घरों के अंदर थे। हां, अलग-अलग जगहों पर कुछ लोग एक साथ बैठे बातें करते भी नज़र आए। कुछ और अंदर गया तो घरों की एक क़तार के सामने एक खेमे में 7-8 पुलिसवाले आराम कर रहे थे। ये घर दलित समाज के मेघवाल के नाम से जाने वाले समुदाय के थे। दिन भर यहाँ गुज़ारने के बाद यहाँ एक दलित बस्ती में ही ख़ौफ़ दिखा। आलम ये है एक दलित बुज़ुर्ग सुखराम कहते हैं, "उस दिन के बाद से हम अपने घरों से निकले नहीं है। भय तो है साहब।"

PICS: 'हम गांव वापिस गए तो वो हमें मार डालेंगे'

rajasthan dangawas dalit not leaving hospital on terror of jaat's

यहाँ जाट समुदाय का दबदबा है, इसलिए उन्हें कोई डर भी नहीं है। एक चबूतरे पर बैठे कुछ जाट बातें कर रहे थे। मैं वहां जाकर बैठ गया और पूछा क्या दलितों के ख़िलाफ़ इतने भयानक हमले के बाद उन्हें अफ़सोस है? एक ने कहा मैं सरकारी मुलाज़िम हूँ। इसलिए मेरा नाम मत लिखिए। फिर उसने बढ़-चढ़ कर जवाब दिया, "आपके मकान पर अगर कोई ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा करेगा तो आप क्या करोगे? बाहर निकल जाओगे? या जो भी करना है करोगे आप। करना ही पड़ेगा। ग़लती दलितों ने की है, दंड उन्होंने भोगा है। अफ़सोस तो उनको होना चाहिए। जाट समाज को मजबूरी में ये करना पड़ा।"

विज्ञापन
विज्ञापन

PICS: 'हम गांव वापिस गए तो वो हमें मार डालेंगे'

rajasthan dangawas dalit not leaving hospital on terror of jaat's

जिस 'मजबूरी' की तरफ इस जाट व्यक्ति का इशारा है वो 14 मई की सुबह का वो कांड है जिसमें 5 दलितों की हत्या कर दी गई थी। घायलों का इलाज अजमेर के एक सरकारी अस्पताल में चला। डॉक्टरों ने उन्हें इलाज के बाद छुट्टी दे दी, लेकिन वो अस्पताल छोड़ कर अपने गाँव जाने को तैयार नहीं थे। हमले में हेमा राम के दोनों पैर और दोनों हाथ तोड़ दिए गए। वो कहते हैं, "हम अपने खेत में थे कि अचानक 200 से 250 लोग मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर और गाड़ियों पर सवार होकर आए और हम पर टूट पड़े। हमें बहुत मारा-पीटा गया, डंडों से, लकड़ियों से और पत्थरों से। वो आधे घंटे तक हमें पीटते रहे।"

विज्ञापन

PICS: 'हम गांव वापिस गए तो वो हमें मार डालेंगे'

rajasthan dangawas dalit not leaving hospital on terror of jaat's

एक घायल ने पुलिस को फोन किया, लेकिन पुलिस समय पर नहीं पहुंची। उसके बग़ल में लेटे एक घायल व्यक्ति ने कहा कि उसके भाई को हमला करने वालों ने पीट-पीट कर मार डाला। इस अस्पताल में 10 से अधिक दलित महिलाएं और पुरुष भर्ती थे और सभी के पैर और हाथ टूटे हुए थे। ऐसा लगता था कि उनके पैरों और हाथों को निशाना बनाया गया था। वो सभी इतने डरे हुए थे कि अपने गाँव जाने को तैयार नहीं थे। मरने वालों में गणेश नाम का एक युवा था जिसके पिता अब भी अस्पताल में भर्ती थे। उनके भी हाथ पैर तोड़ डाले गए थे। गणेश की पत्नी अपनी 4 महीने की बेटी को गोद में लिए अपनी सास और दूसरे रिश्तेदारों से घिरी ये पूछती है कि अब उसका और उसकी बच्ची का भविष्य क्या होगा।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed