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बीएसए आफिस में पति-पत्नी, मां और भाई ने की आत्मदाह की कोशिश, ये थी वजह

Wed, 06 Sep 2017 12:38 AM IST
amarujala.com, Presented by: शारुख खान
amarujala.com, Presented by: शारुख खान Updated Wed, 06 Sep 2017 12:38 AM IST
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If the job was not found, the victim family tried to self-abuse
आत्मदाह की कोशिश करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
बेरोजगारों को नौकरी नहीं मिल रही है। मजबूरी में बेरोजगार मरने को मजबूर हैं। यूपी में एक दिव्यांग ने नौकरी नहीं मिलने पर पूरे परिवार के साथ आत्मदाह की कोशिश की है। पढ़िए कौन है वो दिव्यांग जिसे अब तक नहीं मिली नौकरी। 
If the job was not found, the victim family tried to self-abuse
पीड़ित को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
बीएसए कार्यालय में मृतक आश्रित में लिपिक के पद पर नौकरी न मिलने से खफा एक दिव्यांग, उसकी पत्नी, भाई और मां ने मंगलवार को आत्मदाह करने की कोशिश की। उन्हें अपने ऊपर मिट्टी का तेल उड़ेलते देख मौजूद पुलिस कर्मियों के हाथ-पांव फूल गए। पुलिस वालों ने किसी तरह उन्हें बचाया और थाने पहुंचाया। दरोगा की ओर से चारों के खिलाफ आत्मदाह की कोशिश करने की धाराओं में रिपोर्ट दर्ज की गई है। बीएसए कार्यालय पर करीब डेढ़ घंटे तक अफरा-तफरी मची रही। 
If the job was not found, the victim family tried to self-abuse
पुलिस ने पकड़े परिजन - फोटो : अमर उजाला
 दिव्यांग दिवाकर शर्मा के पिता प्रेमपाल शर्मा गौतरा पट्टी धौनी थाना उसावां के रहने वाले हैं। प्रेमपाल प्राथमिक विद्यालय कैलोठा में प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत थे। दिवाकर शर्मा के मुताबिक 27 जनवरी 2010 को पिता प्रेमपाल का निधन हो गया था। इसके बाद दिवाकर ने एक अक्तूबर 2011 को मृतक आश्रित कोटे में सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति को आवेदन किया, लेकिन तत्कालीन बीएसए रहे कृपाशंकर वर्मा ने उन्हें नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया। 
 
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If the job was not found, the victim family tried to self-abuse
पीड़ित के परिजन - फोटो : अमर उजाला
शिक्षक पद पर नियुक्ति नहीं मिलने के बाद उसने लिपिक पद पर नियुक्ति को कहा। इस पद पर भी नियुक्ति नहीं की गई। जबकि दूसरे व्यक्ति को लिपिक पद पर नियुक्त दे दी गई। वह लगातार चक्कर काट रहा है। उसने न्याय के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग में भी फरियाद की। साथ ही प्रदेश की बेसिक शिक्षामंत्री अनुपमा जायसवाल को भी शिकायती पत्र दिया और स्वयं भी मिला लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। तब उसने धमकी दी थी कि उसकी नियुक्ति लिपिक पद पर नहीं की गई तो वह पांच सितंबर शिक्षक दिवस के मौके पर बीएसए कार्यालय पर पूरे परिवार के साथ आत्मदाह करेगा।
 
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दिवाकर - फोटो : अमर उजाला
दिवाकर शर्मा की सहायक अध्यापक के पद पर नियुक्ति के लायक उस समय  शैक्षिक योग्यता नहीं थी। इन्हें तत्कालीन बीएसए ने चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी का नियुक्ति पत्र दिया था। इस पर इन्होंने ज्वाइन नहीं किया। फिर यह कोर्ट चले गए। शासन से बीच-बीच में लिपिक की नियुक्ति के लिए आदेश आते रहे, उन पर नियुक्ति हो गई। इसके बाद इनका मामला कोर्ट से खारिज हो गया। अब मृतक आश्रित के पद पर अनुकंपा के तौर पर दी जाने वाली नौकरी का निर्धारित समय पांच साल का पूरा हो गया। लिहाजा, इस मामले से शासन को अवगत करा दिया गया है।       
-प्रेमचंद्र यादव, बीएसए, बदायूं
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