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Sawan 2023: इस शिवलिंग के दर्शन मात्र से होती है स्वर्ग की प्राप्ति, निराली है त्रिविष्टपेश्वर महादेव की महिमा
Tue, 01 Aug 2023 01:25 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Tue, 01 Aug 2023 01:25 PM IST
सार
महाकालेश्वर मंदिर में स्थित श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव का प्रतिदिन अभिषेक पूजन और आरती की जाती है। मंदिर में पूरे वर्ष भर सभी त्योहार धूमधाम से मनाएं जाते हैं, लेकिन प्रदोष पर्व पर श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव के पूजन अर्चन का विशेष महत्व है।
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श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
जीवन काल में किए गए कितने ही पाप कर्मों के बावजूद भी प्रत्येक व्यक्ति चाहता है कि मृत्यु के बाद उसे नर्क की यातनाएं न झेलना पड़े और वह स्वर्ग में चला जाए, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि धार्मिक नगरी उज्जैन में एक ऐसा दिव्य शिवलिंग है, जिसके दर्शन करने मात्र से ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। यह दिव्य एवं चमत्कारी शिवलिंग 84 महादेव में सातवें नंबर पर आता है, जो कि विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर के प्रांगण में ओंकारेश्वर मंदिर के पीछे एक गुफा जैसे भाग में स्थित है। मंदिर के पुजारी पंडित लोकेंद्र व्यास के अनुसार मंदिर में भगवान शिव का काले पाषाण का बना हुआ शिवलिंग विराजित है, जो कि अत्यंत चमत्कारी है। साथ ही माता पार्वती, श्री गणेश, कार्तिकेय स्वामी के साथ ही नंदी जी की प्रतिमा भी मौजूद है। यह एक ऐसा शिव मंदिर है जिसके प्रवेश द्वार पर भगवान शिव और हाथी की प्रतिमाएं बनी हुई हैं।
पुजारी पंडित लोकेंद्र व्यास ने बताया कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्थित श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव का प्रतिदिन अभिषेक पूजन और आरती की जाती है। मंदिर में पूरे वर्ष भर सभी त्योहार धूमधाम से मनाएं जाते हैं, लेकिन प्रदोष पर्व पर श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव के पूजन अर्चन का विशेष महत्व है, जिनके दर्शन करने मात्र से ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
कथा बताती है स्वर्ग से भी निराली उज्जैन नगरी
स्कंद पुराण के अवंतीखंड में श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव की कथा का वर्णन मिलता है। जिसमें यह बताया गया है कि एक समय धार्मिक नगरी उज्जैन स्वर्ग से भी निराली थी। यहां दान पुण्य और पूजन अर्चन करने से सभी तीर्थों से अधिक फल की प्राप्ति होती थी। कुछ वर्षों पूर्व देव ऋषि नारद वराहकल्प में भगवान इंद्र देव के दर्शन करने स्वर्ग पहुंचे थे। जहां भगवान इंद्र के पूछने पर उन्होंने जवाब दिया था कि महाकाल वन एक ऐसा स्थान है जहां नौ करोड़ शक्तियां विराजमान हैं और सहस्त्रों कोटि युक्ति-मुक्तिप्रद लिंग यहां होने के साथ ही सरस्वती, गया कूप, कुरुक्षेत्र, नैमिषतीर्थ, पुष्कर, प्रयाग, अमरेश्वर, यहां तक कि वाराणसी से भी उज्जैन दस गुना अधिक फलप्रद है। इंद्र ने जब नारद से महाकाल वन और उज्जैन की ऐसी महिमा सुनी तो वे स्वर्ग से भी प्यारी नगरी उज्जैन को देखने के लिए लालायित हो गए। तुरंत इस नगरी को देखने के लिए महाकाल वन पहुंचे, जहां उन्हें नारद ऋषि द्वारा कही गई बात सही लगी, क्योंकि उज्जैन नगरी स्वर्ग से भी अधिक मनोरम थी। भगवान इंद्र के इस नगरी में आने की सूचना मिलने के बाद अन्य देवता गण भी यही आ गए और स्थितियां कुछ ऐसी बनी कि स्वर्ग खाली हो गया। स्वर्ग के त्रिविष्ट भी जब उज्जैन नगरी आए तो अचानक आकाशवाणी हुई कि त्रिविष्ट यहां अपने नाम से शिवलिंग स्थापित करें, जिससे आने वाले समय में इस शिवलिंग का दर्शन करने वाले सभी लोगों को स्वर्ग की प्राप्ति हो। त्रिविष्ट आकाशवाणी में कही गई बातों के अनुसार ही त्रिविष्टपेश्वर शिवलिंग कि महाकाल वन में स्थापना की गई, जिनका दर्शन करने मात्र से ही श्रद्धालुओं की ना सिर्फ मनोकामनाएं पूर्ण हो रही हैं, बल्कि भगवान का सच्चे मन से पूजन अर्चन कर स्वर्ग की प्राप्ति कर रहे हैं।
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पुजारी पंडित लोकेंद्र व्यास ने बताया कि श्री महाकालेश्वर मंदिर में स्थित श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव का प्रतिदिन अभिषेक पूजन और आरती की जाती है। मंदिर में पूरे वर्ष भर सभी त्योहार धूमधाम से मनाएं जाते हैं, लेकिन प्रदोष पर्व पर श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव के पूजन अर्चन का विशेष महत्व है, जिनके दर्शन करने मात्र से ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
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कथा बताती है स्वर्ग से भी निराली उज्जैन नगरी
स्कंद पुराण के अवंतीखंड में श्री त्रिविष्टपेश्वर महादेव की कथा का वर्णन मिलता है। जिसमें यह बताया गया है कि एक समय धार्मिक नगरी उज्जैन स्वर्ग से भी निराली थी। यहां दान पुण्य और पूजन अर्चन करने से सभी तीर्थों से अधिक फल की प्राप्ति होती थी। कुछ वर्षों पूर्व देव ऋषि नारद वराहकल्प में भगवान इंद्र देव के दर्शन करने स्वर्ग पहुंचे थे। जहां भगवान इंद्र के पूछने पर उन्होंने जवाब दिया था कि महाकाल वन एक ऐसा स्थान है जहां नौ करोड़ शक्तियां विराजमान हैं और सहस्त्रों कोटि युक्ति-मुक्तिप्रद लिंग यहां होने के साथ ही सरस्वती, गया कूप, कुरुक्षेत्र, नैमिषतीर्थ, पुष्कर, प्रयाग, अमरेश्वर, यहां तक कि वाराणसी से भी उज्जैन दस गुना अधिक फलप्रद है। इंद्र ने जब नारद से महाकाल वन और उज्जैन की ऐसी महिमा सुनी तो वे स्वर्ग से भी प्यारी नगरी उज्जैन को देखने के लिए लालायित हो गए। तुरंत इस नगरी को देखने के लिए महाकाल वन पहुंचे, जहां उन्हें नारद ऋषि द्वारा कही गई बात सही लगी, क्योंकि उज्जैन नगरी स्वर्ग से भी अधिक मनोरम थी। भगवान इंद्र के इस नगरी में आने की सूचना मिलने के बाद अन्य देवता गण भी यही आ गए और स्थितियां कुछ ऐसी बनी कि स्वर्ग खाली हो गया। स्वर्ग के त्रिविष्ट भी जब उज्जैन नगरी आए तो अचानक आकाशवाणी हुई कि त्रिविष्ट यहां अपने नाम से शिवलिंग स्थापित करें, जिससे आने वाले समय में इस शिवलिंग का दर्शन करने वाले सभी लोगों को स्वर्ग की प्राप्ति हो। त्रिविष्ट आकाशवाणी में कही गई बातों के अनुसार ही त्रिविष्टपेश्वर शिवलिंग कि महाकाल वन में स्थापना की गई, जिनका दर्शन करने मात्र से ही श्रद्धालुओं की ना सिर्फ मनोकामनाएं पूर्ण हो रही हैं, बल्कि भगवान का सच्चे मन से पूजन अर्चन कर स्वर्ग की प्राप्ति कर रहे हैं।
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