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Sawan 2023: इस शिवलिंग के दर्शन से मिलता है सभी तीर्थों का फल, शिव के गण कुंड को यही मिली थी श्राप से मुक्ति
Mon, 14 Aug 2023 10:38 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Mon, 14 Aug 2023 10:38 AM IST
सार
Sawan 2023: इस शिवलिंग के दर्शन से मिलता है सभी तीर्थों का फल, शिव के गण कुंड को यही मिली थी श्राप से मुक्ति
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कुंडेश्वर महादेव मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
यदि आप सिर्फ एक मंदिर जाकर सभी तीर्थों का धर्मलाभ अर्जित करना चाहते हैं, तो आप धार्मिक नगरी उज्जैन में स्थित श्री कुंडेश्वर महादेव मंदिर के दर्शन कीजिए। क्योंकि ऐसी मान्यता है कि इनके दर्शन करने मात्र से ही सभी तीर्थों का पूजन अर्चन करने का फल प्राप्त हो जाता है। 84 महादेव में 40वां स्थान रखने वाले श्री कुंडेश्वर महादेव की महिमा अत्यंत निराली है। यह मंदिर अंकपात मार्ग पर भगवान श्री कृष्ण की पाठशाला यानी श्री सांदीपनि आश्रम में स्थित है। मंदिर में भगवान शिव का काले रंग का पाषाण का शिवलिंग स्थित है, जो कि अत्यंत चमत्कारी और दिव्य है।
भगवान कृष्ण का है मंदिर से खास नाता
- फोटो : अमर उजाला
गोमती कुंड के जल से शिवलिंग का जलाभिषेक करते थे श्री कृष्ण
श्री कुंडेश्वर महादेव मंदिर के पास अति प्राचीन गोमती कुंड भी है, जिसके बारे में बताया जाता है कि इस जल से भगवान श्री कृष्ण कुंडेश्वर महादेव का पूजन अर्चन व जलाभिषेक किया करते थे।
दाईं ओर उमा महेश तो बाई ओर है तांत्रिक शिव
श्री कुंडेश्वर महादेव का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर है, इसमें दाई और उमा महेश तो बाई और तांत्रिक शिव विराजमान हैं। मंदिर के बाहर खड़े नंदी की प्रतिमा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। क्योंकि यह पहली ऐसी प्रतिमा है जिसमें नंदी जी खड़े हुए दिखाई देते हैं। बताया जाता है कि अति प्राचीन इस प्रतिमा पर विक्रम लिखा हुआ है। मंदिर के समीप ही वल्लभाचार्य जी की बैठक भी है।
श्री कुंडेश्वर महादेव मंदिर के पास अति प्राचीन गोमती कुंड भी है, जिसके बारे में बताया जाता है कि इस जल से भगवान श्री कृष्ण कुंडेश्वर महादेव का पूजन अर्चन व जलाभिषेक किया करते थे।
दाईं ओर उमा महेश तो बाई ओर है तांत्रिक शिव
श्री कुंडेश्वर महादेव का मुख्य द्वार पूर्व दिशा की ओर है, इसमें दाई और उमा महेश तो बाई और तांत्रिक शिव विराजमान हैं। मंदिर के बाहर खड़े नंदी की प्रतिमा यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। क्योंकि यह पहली ऐसी प्रतिमा है जिसमें नंदी जी खड़े हुए दिखाई देते हैं। बताया जाता है कि अति प्राचीन इस प्रतिमा पर विक्रम लिखा हुआ है। मंदिर के समीप ही वल्लभाचार्य जी की बैठक भी है।
मंदिर में मौजूद हैं कई प्रतिमाएं
- फोटो : अमर उजाला
यहां कुंड को मिली थी श्राप से मुक्ति
श्री कुंडेश्वर महादेव की कथा बताती है कि भगवान शिव के ही गण कुंड को जब माता पार्वती ने श्राप दिया तो इससे मुक्ति पाने के लिए कुंड ने भगवान शिव की आराधना की और इस श्राप से मुक्ति पाई। बताया जाता है कि एक बार भगवान शिव, माता पार्वती के साथ नंदी पर बैठकर महाकाल वन पहुंचे थे। जहां माता पार्वती को अचानक थकान होने लगी जिस पर भगवान शिव ने उन्हें महाकाल वन में ही रुककर उनकी प्रतीक्षा करने को कहा था। इस दौरान भगवान शिव मां पार्वती की रक्षा के लिए यहां पर अपने गण कुंड और नंदी को छोड़ कर गए थे। लेकिन जब कई दिन गुजरने के बाद भी भगवान शिव नहीं लौटे तो माता पार्वती ने कुंड नामक गण को आज्ञा दी कि जाओ और भगवान शिव का पता लगाओ। परंतु कुंड नामक गण ने माता की आज्ञा का पालन इसलिए नहीं किया क्योंकि भगवान शिव ने उसे माता पार्वती की सुरक्षा के लिए यहां तैनात किया था। माता पार्वती के आदेशों की अव्हेलना जब गण ने की तो माता पार्वती क्रोधित हो गई और उन्होंने कुंड को मनुष्य योनि में जाने का श्रााप दे डाला। श्राप देने के बाद जब कुंड ने माता पार्वती से श्राप से मुक्ति के लिए निवेदन किया तो उन्होंने कुंड को उज्जैन में ही स्थित शिवलिंग का पूजन अर्चन करने को कहा था, जिससे कि उन्हें श्राप से मुक्ति मिली। भगवान शिव के गण कुंड ने माता पार्वती द्वारा बताए गए उपाय के आधार पर भगवान की पूजा आराधना की। कुछ दिनों बाद भगवान शंकर विचरण करने के बाद पुन: उज्जैन आए तो उन्हें अपने गण कुंड को दिए गए श्राप की जानकारी लगी। जिस पर भगवान शंकर शिवलिंग से प्रकट हुए और उन्होंने कुंड की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे पुन: मनुष्य की योनि से मुक्त कर पहले की योनि में स्थान देकर अपना गण बना लिया। इस स्थान पर शिवलिंग से भगवान शिव प्रकट हुए थे और यहां शिव के गण कुंड ने तपस्या की थी इसीलिए यह शिवलिंग कुंडेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
श्री कुंडेश्वर महादेव की कथा बताती है कि भगवान शिव के ही गण कुंड को जब माता पार्वती ने श्राप दिया तो इससे मुक्ति पाने के लिए कुंड ने भगवान शिव की आराधना की और इस श्राप से मुक्ति पाई। बताया जाता है कि एक बार भगवान शिव, माता पार्वती के साथ नंदी पर बैठकर महाकाल वन पहुंचे थे। जहां माता पार्वती को अचानक थकान होने लगी जिस पर भगवान शिव ने उन्हें महाकाल वन में ही रुककर उनकी प्रतीक्षा करने को कहा था। इस दौरान भगवान शिव मां पार्वती की रक्षा के लिए यहां पर अपने गण कुंड और नंदी को छोड़ कर गए थे। लेकिन जब कई दिन गुजरने के बाद भी भगवान शिव नहीं लौटे तो माता पार्वती ने कुंड नामक गण को आज्ञा दी कि जाओ और भगवान शिव का पता लगाओ। परंतु कुंड नामक गण ने माता की आज्ञा का पालन इसलिए नहीं किया क्योंकि भगवान शिव ने उसे माता पार्वती की सुरक्षा के लिए यहां तैनात किया था। माता पार्वती के आदेशों की अव्हेलना जब गण ने की तो माता पार्वती क्रोधित हो गई और उन्होंने कुंड को मनुष्य योनि में जाने का श्रााप दे डाला। श्राप देने के बाद जब कुंड ने माता पार्वती से श्राप से मुक्ति के लिए निवेदन किया तो उन्होंने कुंड को उज्जैन में ही स्थित शिवलिंग का पूजन अर्चन करने को कहा था, जिससे कि उन्हें श्राप से मुक्ति मिली। भगवान शिव के गण कुंड ने माता पार्वती द्वारा बताए गए उपाय के आधार पर भगवान की पूजा आराधना की। कुछ दिनों बाद भगवान शंकर विचरण करने के बाद पुन: उज्जैन आए तो उन्हें अपने गण कुंड को दिए गए श्राप की जानकारी लगी। जिस पर भगवान शंकर शिवलिंग से प्रकट हुए और उन्होंने कुंड की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे पुन: मनुष्य की योनि से मुक्त कर पहले की योनि में स्थान देकर अपना गण बना लिया। इस स्थान पर शिवलिंग से भगवान शिव प्रकट हुए थे और यहां शिव के गण कुंड ने तपस्या की थी इसीलिए यह शिवलिंग कुंडेश्वर महादेव के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
