फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

Rajgarh: मुश्किलों को हराकर हौसलों की मिसाल बनीं अंशु, अब महिलाओं और युवतियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

Sun, 27 Aug 2023 12:39 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़ Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Sun, 27 Aug 2023 12:39 PM IST
सार

Rajgarh: मुश्किलों को हराकर हौसलों की मिसाल बनीं अंशु, अब महिलाओं और युवतियों को बना रहीं आत्मनिर्भर

विज्ञापन
Rajgarh: Anshu became an example of courage by defeating difficulties, now making women and girls self-reliant
अंशु आज महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं - फोटो : अमर उजाला
राजस्थान की सीमा से सटे राजगढ़ जिले में आज भी नातरा-झगड़ा जैसी कुप्रथाएं आज भी प्रचलित हैं, जिससे पीड़ित कई महिलाएं आज भी संघर्ष कर रही हैं। ऐसे जिले में कुछ कर दिखाना काफी मुश्किल लगता था, लेकिन अंशु ने अपने दृढ़ निश्चय और हौसले से इस नामुमकिन काम को मुमकिन कर दिखाया है। आज वे न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को रोजगार से जोड़कर उन्हें भी आत्मनिर्भर बना रही हैं।


राजगढ़ जिले के ब्यावरा शहर की अंशु सेन अपने छह भाई बहनों में घर की सबसे बड़ी बेटी हैं, जिन्होंने शुरुआत से ही अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को देखते हुए पिता की नाई की दुकान पर उनका हाथ बटाया। 2002 में खिलचीपुर तहसील के सैदरा गांव निवासी दीपक सेन के साथ उनकी सगाई तय हो गई, सगाई के बाद अंशु के ससुराल वालों को उनकी होने वाली बहु का दुकान पर बैठकर बाल काटने वाला काम रास नहीं आया और वे उनके इस काम का विरोध करने लगे।
Rajgarh: Anshu became an example of courage by defeating difficulties, now making women and girls self-reliant
क्षेत्र की अन्य महिलाओं को रोजगार दे रही हैं अंशु - फोटो : अमर उजाला
2004 में 13 वर्ष की उम्र में अंशु का विवाह हो गया और वे अपने ससुराल चली गई। 2008 में अंशु ने एक बेटी को जन्म दिया और उस समय अंशु की उम्र 17 वर्ष थी। बिटिया पैदा होने के बाद उसकी अच्छी परवरिश और पढ़ाई लिखाई की फिक्र अंशु को सताने लगी और उन्हें फिक्र होने लगी कि जिस तरह से दूसरों के कपड़े पहनकर उन्होंने अपना बचपन गुजारा है, उनकी बिटिया ऐसे जीवन न गुजारे। ऐसे में बचपन से ही कैंची से लगाव रखने वाली अंशु ने पार्लर का कोर्स करने का विचार किया और अपने पति से इस बारे में बात की। पति अपनी पत्नी की भावनाओ की कद्र करते हुए उनकी पत्नी को भोपाल में एक माह का कोर्स कराने के लिए राजी हो गए। लेकिन उस समय पति की हैसियत कोर्स कराने के लायक नहीं थी। जैसे तैसे शासकीय योजना के माध्यम से भोपाल में उन्होंने एक माह की ट्रेनिंग की और उस काम में लगाव होने के चलते वे 15 दिनों में ही परफेक्ट हो गईं और भोपाल में ही किसी पार्लर पर उन्होंने काम करना शुरू कर दिया और वापस लौटकर अपने ही क्षेत्र में सैलून व पार्लर डालने की सोची, लेकिन ससुराल पक्ष का विरोध जारी था और उन्हें उनके पति व एक छोटी बिटिया के साथ ससुराल से भी बेदखल कर दिया गया।
Rajgarh: Anshu became an example of courage by defeating difficulties, now making women and girls self-reliant
अपने हुनर के दम पर प्रसिद्धि पा रहीं अंशु - फोटो : अमर उजाला
2009 में अंशु अपने पति व एक छोटी बिटिया के साथ ससुराल से निकल आईं और अपनी मेहनत लगन व पति के समर्थन के साथ उन्होंने नई ऊंचाइयां और बुलंदियों को छुआ और भोपाल इंदौर और पुणे जैसे महानगरों में काम करने के बाद अंशु राजगढ़ में अपना खुद का सैलून संचालित करती हैं। उन्होंने अन्य बेरोजगार युवतियों को भी रोजगार से जोड़ा है। उनके सैलून में उनके देवर भी काम करते है, जिनका परिवार पहले अंशु के सैलून चलाने का विरोध किया करता था। अंशु अपनी  बेटी दीपांशी बेटा अथर्व व पति दीपक सेन के साथ बेहतर तरीके से अपना जीवन यापन कर रही हैं और आत्मनिर्भर महिलाओ की फेहरिस्त में शामिल हैं। अंशु एक मिसाल भी हैं, जिन्होंने इतने संघर्ष और अपनी मेहनत से मुकाम हासिल किया है।
अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed