ओंकारेश्वर के आसपास के जंगलों में बड़ी मात्रा में अवैध रूप से कच्ची शराब का निर्माण किया जा रहा है। यह शराब महुआ, लहान और अन्य जहरीले रसायनों से बनाई जाती है। खुले जंगलों में लकड़ी जलाकर बनाए जा रहे ड्रम और भट्ठियां न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रही हैं, बल्कि समाज के युवा वर्ग को नशे की लत में धकेल रही हैं।
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ओंकारेश्वर पुलिस ने बड़ी मात्रा में कच्ची शराब पकड़ी
- फोटो : अमर उजाला
हाल ही में ओंकारेश्वर पुलिस ने एक साहसिक अभियान चलाकर इन जंगलों में छापा मारा। खंडवा पुलिस अधीक्षक मनोज राय के निर्देश के बाद एसडीओपी मुंदी और थाना प्रभारी अनूपसिंह सिंधिया के नेतृत्व में पुलिस टीम करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर जंगलों के भीतर उन ठिकानों तक पहुंची, जहां यह कच्ची शराब तैयार की जा रही थी। टीम में सहायक उप निरीक्षक कमलेश नागराज, आरक्षक रवि सोलंकी, जितेंद्र करोले, नंदराम दंगोड़े और चंद्रवीर शामिल थे।
अभियान में पुलिस ने कई ड्रम, भट्ठियां और तैयार महुआ लहान को नष्ट किया। हालांकि शराब माफिया पहले ही जंगल की आड़ लेकर भाग निकले। यह शराब न केवल अवैध है, बल्कि अत्यंत जानलेवा भी। इसमें इस्तेमाल होने वाले रसायन और अधपके महुआ से तैयार तरल युवाओं की किडनी, लीवर और तंत्रिका तंत्र को तेजी से क्षतिग्रस्त करता है। कई मामलों में तो नशे के बाद अंधापन, लकवा और यहां तक कि मौत तक हो जाती है।