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Navratri: एमपी में है 171 साल पुरानी देवी प्रतिमा, छह माह में एक बार मिलते हैं दर्शन, दूर-दूर से आते हैं भक्त

Wed, 28 Sep 2022 07:27 AM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Wed, 28 Sep 2022 07:27 AM IST
सार

Navratri: एमपी में है 171 साल पुरानी देवी प्रतिमा, छह माह में एक बार मिलते हैं दर्शन, दूर-दूर से आते हैं भक्त

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Navratri 171 year old goddess statue in MP darshan meets once in six months devotees come from far and wide
दमोह में स्थित देवी मां की 171 साल पुरानी प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
मध्यप्रदेश के दमोह जिले में मां दुर्गा का एक ऐसा मंदिर हैं, जहां 171 साल पुरानी देवी की मिट्टी से बनी प्रतिमा स्थापित है। इस दरबार का ख्याति दूर-दूर तक फैली है। लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर यहां प्रदेश के कोने-कोने से पहुंचते हैं। देवी मां की यह प्राचीन प्रतिमा फुटेरा फाटक के समीप भारत दुर्गा देवालय में स्थापित है।


 
Navratri 171 year old goddess statue in MP darshan meets once in six months devotees come from far and wide
साल में केवल दो बार मिलते हैं माता के दर्शन - फोटो : अमर उजाला
एक ही पीढ़ी के लोग कर रहे मां की सेवा
यह मंदिर कई मायनों में खास माना जाता है। एक ही पीढ़ी के लोग यहां कई वर्षों से देवी मां की पूजा करते आ रहे हैं। मंदिर की स्थापना1851 में पंडित हरप्रसाद भारत ने की थी। उनके बाद मंदिर में उनकी ही पीढ़ी के पुजारी पंडित नरेंद्र भारत गुरूजी मातारानी की सेवा करते चले आ रहे थे। इसी साल उनके निधन के बाद उनके पुत्र शांतनु भारत मंदिर के पुजारी बने हैं।

मिट्टी से निर्मित है प्रतिमा
देवी मां की यह प्रतिमा विशुद्ध रूप से मिट्टी से बनी है। जानकारों के मुताबिक जिले की यह पहली दस भुजाधारी प्रतिमा है। जो शूल से राक्षस का संहार करती नजर आती है। वहीं इस प्रतिमा के दाएं एवं बाएं माता रानी की गणिकाएं भी विराजमान हैं। इस प्रतिमा का निर्माण दमोह जिले के हटा में किया गया था। उस समय माता रानी की इस प्रतिमा को बैलगाड़ी से दमोह लाया गया था। देवी मां का मंदिर साल में दो बार खुलता है। एक बार चैत्र और दूसरी बार क्वार में। नवरात्रि के दिनों में ही लोगों को इस दरबार के दर्शन हो पाते है। श्रद्धालु मातारानी के दर्शनों के लिए लालायित रहते हैं।
 
Navratri 171 year old goddess statue in MP darshan meets once in six months devotees come from far and wide
मिट्टी से बनी है प्रतिमा - फोटो : अमर उजाला
22 दिन तक थाने में विराजमान रही प्रतिमा
बताया जाता है कि 1851 में माता की प्रतिमा की स्थापना की गई, उस दौरान देवी की प्रतिमा को दशहरे के अवसर पर शहर में भ्रमण के लिए निकाला जाता था। 1944 में दमोह के द्वारका प्रसाद श्रीवास्तव ने गौ हत्या का विरोध करके आंदोलन चलाया था, जिसके चलते दशहरा चल समारोह के बीच में अंग्रेजों ने जुलूस पर रोक लगा दी। जिसके बाद करीब 22 दिन तक मातारानी की यह प्रतिमा पुराना थाना में रखी रही थी। वहीं, प्रतिमा का लगातार पूजन किया जाता रहा। इसी दौरान पुजारी ने मां से प्रार्थना की। पुजारी ने कहा कि मां  यह प्रतिबंध हटवा दो आगे कभी भी आपकी प्रतिमा को मंदिर से बाहर नहीं निकाला जाएगा। उसी समय ब्रिटिश अफसरों ने रोके गए जुलूस को आगे बढ़ने का फरमान सुना दिया। मां के चमत्कार के बाद माता की इस प्रतिमा को तब से ही मंदिर में स्थापित कर दिया गया। तब से आज तक यह प्रतिमा यहीं पर विराजमान है। जिसके दर्शन करने दमोह जिले के अलावा प्रदेश के कई स्थानों से लोग पहुंचते हैं।
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