मां नर्मदा के पावन तट पर स्थित धार्मिक नगरी महेश्वर एक बार फिर आस्था और भक्ति के रंग में रंग उठी है। अहिल्या नगरी में सोमवार रात्रि पंचकोशी यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने शिव अर्पण नगरी के विविध घाटों पर रात्रि विश्राम किया। मंगलवार प्रातः 5 बजे यह यात्रा अपने 39वें वर्ष में प्रवेश करते हुए एक नई आध्यात्मिक यात्रा का शुभारंभ करेगी।
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महेश्वर के घाट पर रुकी पंचकोशी यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
नर्मदा परिक्रमा का संपूर्ण मार्ग 1312 किलोमीटर लंबा होता है, जिसे पूर्ण करने में साधकों को तीन वर्ष, तीन माह और तेरह दिन का समय लगता है। यह कठिन और तपस्वी यात्रा सभी के लिए संभव नहीं होती, इसलिए धर्मशास्त्रों और संतों के मार्गदर्शन में नर्मदा भक्तों ने 21 लघु चक्रीय यात्राओं का विधान बनाया है। इन लघु यात्राओं में भी श्रद्धा, भक्ति और तप की उसी भावना का दर्शन होता है।
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महेश्वर के घाट पर रुकी पंचकोशी यात्रा
- फोटो : अमर उजाला
यह यात्रा प्रतिवर्ष शुक्ल पक्ष की एकादशी से प्रारंभ होकर शुक्ल पूर्णिमा तक चलती है। मंगलवार सुबह लगभग 5:30 बजे अहिल्या घाट पर मां नर्मदा का पूजन कर यात्रा का शुभारंभ होगा। दूर-दराज से आए हजारों श्रद्धालु इस पावन पदयात्रा में सम्मिलित होंगे। पंचकोशी यात्रा न केवल आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक एकता का भी जीवंत उदाहरण है। महेश्वर का अहिल्या घाट एक बार फिर भक्ति, नाद और “नर्मदा मैया की जय” के जयघोष से गूंज उठा है।
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पंचकोशी यात्रा की विशेषताएं
- कुल दूरी: लगभग 70 किलोमीटर
- समय अवधि: 5 दिन
- यात्रा मार्ग: निमाड़ और मालवा क्षेत्र के 25 से अधिक गांवों से होकर
- धार्मिक स्थल: 50 से अधिक प्रमुख तीर्थस्थलों का दर्शन
- श्रद्धालु संख्या: लगभग 15,000 पदयात्री