मध्यप्रदेश के सागर जिले के तिली क्षेत्र स्थित ज्ञानोदय आवासीय विद्यालय के शिक्षक महेंद्र कुमार लोधी ने यह साबित कर दिया कि एक शिक्षक केवल किताबी ज्ञान देने वाला नहीं होता, बल्कि समाज का निर्माता भी होता है। उन्होंने जिस जगह हरियाली फैलाई, वहां कभी छाया तक नहीं थी। चट्टानी ज़मीन, पानी की कमी और मिट्टी का अभाव जैसी कठिनाइयाँ भी उनके संकल्प के सामने टिक नहीं पाईं।
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पर्यावरण संरक्षण
- फोटो : अमर उजाला
बंजर पहाड़ी को हराभरा करने का संकल्प
वर्ष 2007 में जब अनुसूचित जाति-जनजाति के छात्रों के लिए ज्ञानोदय विद्यालय की स्थापना हुई, तब यह स्कूल एक वीरान, बंजर और चट्टानों से भरी पहाड़ी पर स्थित था। जब महेंद्र कुमार लोधी की पदस्थापना हुई, तब उन्होंने यहां हरियाली लाने की ठानी। चट्टानों में मिट्टी डलवाई, पौधों को संतान की तरह पाला और हजारों पेड़ लगाए। आज यह परिसर पेड़ों, फूलों और फलों से भरा हुआ है।
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एनएसएस के माध्यम से छात्रों को जोड़ा
महेंद्र कुमार लोधी ने अकेले ही यह कार्य नहीं किया। एनएसएस प्रभारी के रूप में उन्होंने छात्रों को इस अभियान से जोड़ा। ‘क्लीन एंड ग्रीन कैंपस’ अभियान को एक जनांदोलन का रूप दिया। छात्र न केवल पौधे लगाते हैं, बल्कि उनकी देखभाल भी करते हैं। इससे छात्रों में नेतृत्व, ज़िम्मेदारी और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता का विकास हुआ।
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स्थानीय स्तर पर वैश्विक संकट का हल
आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग की चिंता में डूबी है, ऐसे में महेंद्र कुमार लोधी जैसे शिक्षक यह उदाहरण पेश करते हैं कि समाधान की शुरुआत घर से ही होती है। उन्होंने केवल वृक्ष नहीं लगाए, बल्कि प्रकृति-प्रेम की सोच बोई, जो आने वाली पीढ़ियों को जिम्मेदार बनाएगी।
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नवाचार के साथ उत्कृष्ट शिक्षण
एक बायोलॉजी शिक्षक के रूप में महेंद्र कुमार लोधी ने विज्ञान को किताबों तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने नवाचार और व्यावहारिकता के साथ पिछले 17 वर्षों से लगातार शत-प्रतिशत प्रथम श्रेणी परीक्षा परिणाम दिए हैं। उनका शिक्षण विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ता है और उन्हें समग्र विकास की ओर प्रेरित करता है।