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Indore News: इंदौर को नहीं मिला ट्रांसपोर्ट हब, पूरा शहर बन रहा ट्रकों की पार्किंग

Tue, 04 Nov 2025 06:15 PM IST
अर्जुन रिछारिया अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर Published by: अर्जुन रिछारिया Updated Tue, 04 Nov 2025 06:15 PM IST
सार

Indore News: इंदौर का बहुप्रतीक्षित 72 करोड़ का ट्रांसपोर्ट हब प्रोजेक्ट जमीन विवाद और प्रशासनिक अड़चनों के कारण ठप हो गया है। हब न बनने से रहवासी इलाकों में भारी वाहनों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे ट्रैफिक जाम और हादसों का खतरा बढ़ गया है।

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Indore news Transport Hub project land acquisition issues traffic
मांगलिया में सड़कों पर खड़े भारी वाहन - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
इंदौर को मध्यभारत का लॉजिस्टिक हब बनाने का सपना फिलहाल कागजों में ही सिमट कर रह गया है। शहर को भारी वाहनों के दबाव से मुक्ति दिलाने वाला 72 करोड़ का ट्रांसपोर्ट हब प्रोजेक्ट शुरू होने से पहले ही ठप पड़ गया है। हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार से अक्टूबर 2023 में मंजूरी मिलने और 50 करोड़ रुपए जारी होने के बावजूद, प्रोजेक्ट की प्रगति शून्य है। इस हब के 2025 तक तैयार होने का दावा किया गया था, लेकिन अब तक काम शुरू भी नहीं हो पाया है। पूरे शहर में जगह जगह ट्रक और बस खड़े रहते हैं। भारी वाहन शहर के रहवासी क्षेत्रों तक जा रहे हैं और लगातार हादसे भी हो रहे हैं। यदि ट्रांसपोर्ट हब समय पर बना दिया जाता तो यह सब परेशानियों से मुक्ति मिल जाती। बताया जा रहा है कि सैकड़ों ट्रकों को खड़े करने के लिए शहर में कहीं जगह ही नहीं मिल रही है। 


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ट्रांसपोर्ट नगर - फोटो : अमर उजाला, डिजिटल डेस्क, इंदौर
शहर भर में जाम और परेशानी
ट्रांसपोर्ट हब न होने का खामियाजा पूरा शहर भुगत रहा है। पूरे शहर में जगह-जगह ट्रक और बसें अवैध रूप से खड़ी रहती हैं। इंदौर ट्रांसपोर्टेशन का मुख्य केंद्र होने के कारण यहां देश भर से भारी वाहन आते हैं। छावनी अनाज मंडी में लगातार अनाज के ट्रक आ रहे हैं। बाणगंगा क्षेत्र में इंडस्ट्री से जुड़े भारी वाहन आते हैं। सांवेर रोड और बायपास पर कई जगह वेयर हाउस बने हुए हैं, जहां से भारी वाहन सामान का लाना ले जाना करते हैं। लोहामंडी, सियागंज और लसूड़िया क्षेत्र में भी रातभर ट्रकों की आवाजाही लगी रहती है। इंदौर ट्रांसपोर्टेशन के लिए मध्यभारत का केंद्र है। इसलिए यहां पर देश के कोने कोने से भारी वाहन आते हैं। ये भारी वाहन शहर के अंदरूनी हिस्सों तक पहुंच रहे हैं, जिससे लगातार हादसे भी हो रहे हैं।

क्या था प्रोजेक्ट और क्यों अटका?
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय ने टीपीएस-3 के अंतर्गत अरंडिया गांव में 11 हेक्टेयर जमीन पर इसे बनाने की मंजूरी दी थी। इसकी कुल लागत 72 करोड़ रुपए आंकी गई थी, जिसमें से 50 करोड़ रुपए आईडीए को केंद्रीय गति शक्ति मिशन से मिल भी चुके हैं। इस हब में ट्रकों के लिए पार्किंग, गैरेज, रेस्टोरेंट, विश्राम स्थल और पार्ट्स सप्लाई जैसी सुविधाएं होनी थीं। प्रोजेक्ट में देरी का मुख्य कारण जमीन संबंधी विवाद, नक्शा संशोधन और स्वीकृति प्रक्रियाओं में होने वाली अड़चनें बताई जा रही हैं। इंदौर ट्रक ऑपरेटर एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का भी कहना है कि अगर हब समय पर बनता, तो उनका व्यापार केंद्रित हो जाता और शहर की सड़कों पर दबाव कम होता।

अधिकारी बोले- किसान जमीन नहीं दे रहे
मामले पर आईडीए के सहायक यंत्री पंकज वैशंपायन ने बताया कि प्रोजेक्ट के लिए जैसी जमीन चाहिए, वैसी नहीं मिल पा रही है। कुछ किसान जमीन देने से मना कर रहे हैं, जिनसे बातचीत कर समाधान निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जैसे-जैसे जमीन मिल रही है, काम आगे बढ़ाया जा रहा है और हब तक पहुंचने के लिए सड़क का काम शुरू कर दिया गया है।
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