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Indore News: गांव-गांव गए गांधी, जनता की परेशानियों को समझा, कई प्रयोग किए और देश को जगाया
Wed, 02 Oct 2024 08:34 PM IST
अर्जुन रिछारिया
अमर उजाला, डिजीटल डेस्क, इंदौर
अमर उजाला, डिजीटल डेस्क, इंदौर
Published by: अर्जुन रिछारिया
Updated Wed, 02 Oct 2024 08:34 PM IST
सार
गांधी जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में महात्मा गांधी के जीवन के मूल्यों को साझा किया गया। शहर के बुद्धिजीवी और समाजसेवियों के साथ अलग अलग संस्थाओं के सदस्य कार्यक्रम में शामिल हुए।
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हिन्दी साहित्य समिति में आयोजित कार्यक्रम।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
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गांधी एक ऐसे कालजयी व्यक्तित्व का नाम है जिसने भारत की हजारों वर्ष पुरानी संस्कृति का न केवल साक्षात्कर किया, बल्कि उसकी तुलना में दुनियाभर के कई महापुरुष बौने साबित होते हैं। स्त्री- पुरुष के भेद को सबसे पहले खत्म गांधी ने ही किया था। महिलाओं की भागीदारी के बगैर गांधी के आंदोलन की कल्पना नहीं की जा सकती। गांधी ने धर्म भेद और जाति भेद की अस्मिता को समाप्त किया और धर्म निरपेक्षता का झंडा पूरी ताकत से बुलंद किया। यह बात 155 वी गांधी जयंती के अवसर पर "गांधी का धर्मनिरपेक्ष भारत" विषय पर आयोजित व्याख्यान देते हुए वरिष्ठ गांधीवादी विचारक उत्तम भाई परमार ने कही।
कार्यक्रम में पधारे मुख्य अतिथि।
- फोटो : अमर उजाला, इंदौर
गांवों में घूमकर जानी जमीनी हकीकत
व्याख्यान का आयोजन अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन, राममनोहर लोहिया सामाजिक समिति, केंद्रीय श्रम संगठनों की संयुक्त अभियान समिति, असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस और विचार मंच ने किया था। परमार ने आगे कहा कि गांधी विदेश से पढ़कर 1915 मे भारत आए और पूरे देश के गांव-गांव घूमे और यहां की गरीबी, अशिक्षा, भुखमरी को बहुत करीब से देखा। उन्होंने अलग- अलग प्रयोग करके देश को जगाने का प्रयास किया, जिसमें वे सफल भी हुए।
गांधी व्यक्ति नहीं विचार थे
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में समाजवादी विचारक सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि गांधी व्यक्ति नहीं विचार थे। वे प्रयोगधर्मी नेता थे। उन्होंने सत्याग्रह का आविष्कार किया। गांधी ने अबोले को बोल दिए और उसे समाज की मुख्य धारा से जोड़ा। वे धर्म निरपेक्षता के सबसे बड़े हामी थे। गांधीवादी विचारक अनिल त्रिवेदी ने कहा कि भारत हमेशा से धर्म निरपेक्ष रहा और यहां के आमजन को किसी धर्म या पंथ से कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। यह समस्या केवल सत्ताधारियों की है। कांग्रेस नेता
राकेश यादव ने कहा कि देश में नकली गांधी वादियों की आज बाढ़ सी आ गई है जो अपने हितों के लिए गांधी का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं जो चिंता का विषय है।
गांधी कहते थे धर्म मेरा निजी मामला है
कार्यक्रम के प्रारंभ में अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन के महासचिव अरविंद पोरवाल ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष भारत को हमने संविधान द्वारा अंगीकार किया है और आज देश में कतिपय ताकतों द्वारा इसे चुनौती दी जा रही है, जबकि गांधी ने एक कट्टर धार्मिक अनुयायी होते हुए भी धर्मनिरपेक्ष भारत की वकालत करते हुए कहा था कि धर्म मेरा निजी मामला है और राज्य का कोई धर्म नहीं होता। इस्राइल- फिलिस्तीन विवाद पर भी गांधी का स्पष्ट मत था कि अरबों का फिलिस्तीन पर उतना ही हक है जितना अंग्रेजों का इंग्लैंड और फ्रेंच लोगों का फ्रांस पर। इस अवसर पर धर्मनिरपेक्ष भारत और इस्राइल-फिलीस्तीन विवाद पर गांधी के दर्शन और विचारों पर आधारित एक ब्रोशर का विमोचन भी किया गया।
गांधी के प्रिय भजन सुनाए
इस मौके पर शर्मिष्ठा बनर्जी ने संगीत की धुन पर गांधीजी का प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेने कहिये के बाद साहिर लुधयानवी का गीत सर झुकाने से कुछ नहीं होगा और नीरज की गजल अब तो कोई ऐसा मजहब चलाया जाए सुनाकर खूब दाद बटोरी। अतिथि स्वागत फादर पायस, सुभाष रानाडे, योगेंद्र महावर ने किया। मिलिंद रावल, अशोक दुबे, रुद्रपाल यादव ने प्रतिक चिन्ह प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन विवेक मेहता ने किया। आभार माना श्याम सुंदर यादव ने। इस मौके पर पदमश्री जनक पलटा राहुल निहोरे, शफी शेख, राम बाबू अग्रवाल, रामेश्वर गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
व्याख्यान का आयोजन अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन, राममनोहर लोहिया सामाजिक समिति, केंद्रीय श्रम संगठनों की संयुक्त अभियान समिति, असंगठित कामगार एवं कर्मचारी कांग्रेस और विचार मंच ने किया था। परमार ने आगे कहा कि गांधी विदेश से पढ़कर 1915 मे भारत आए और पूरे देश के गांव-गांव घूमे और यहां की गरीबी, अशिक्षा, भुखमरी को बहुत करीब से देखा। उन्होंने अलग- अलग प्रयोग करके देश को जगाने का प्रयास किया, जिसमें वे सफल भी हुए।
गांधी व्यक्ति नहीं विचार थे
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में समाजवादी विचारक सुभाष खंडेलवाल ने कहा कि गांधी व्यक्ति नहीं विचार थे। वे प्रयोगधर्मी नेता थे। उन्होंने सत्याग्रह का आविष्कार किया। गांधी ने अबोले को बोल दिए और उसे समाज की मुख्य धारा से जोड़ा। वे धर्म निरपेक्षता के सबसे बड़े हामी थे। गांधीवादी विचारक अनिल त्रिवेदी ने कहा कि भारत हमेशा से धर्म निरपेक्ष रहा और यहां के आमजन को किसी धर्म या पंथ से कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। यह समस्या केवल सत्ताधारियों की है। कांग्रेस नेता
राकेश यादव ने कहा कि देश में नकली गांधी वादियों की आज बाढ़ सी आ गई है जो अपने हितों के लिए गांधी का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं जो चिंता का विषय है।
गांधी कहते थे धर्म मेरा निजी मामला है
कार्यक्रम के प्रारंभ में अखिल भारतीय शांति एवं एकजुटता संगठन के महासचिव अरविंद पोरवाल ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष भारत को हमने संविधान द्वारा अंगीकार किया है और आज देश में कतिपय ताकतों द्वारा इसे चुनौती दी जा रही है, जबकि गांधी ने एक कट्टर धार्मिक अनुयायी होते हुए भी धर्मनिरपेक्ष भारत की वकालत करते हुए कहा था कि धर्म मेरा निजी मामला है और राज्य का कोई धर्म नहीं होता। इस्राइल- फिलिस्तीन विवाद पर भी गांधी का स्पष्ट मत था कि अरबों का फिलिस्तीन पर उतना ही हक है जितना अंग्रेजों का इंग्लैंड और फ्रेंच लोगों का फ्रांस पर। इस अवसर पर धर्मनिरपेक्ष भारत और इस्राइल-फिलीस्तीन विवाद पर गांधी के दर्शन और विचारों पर आधारित एक ब्रोशर का विमोचन भी किया गया।
गांधी के प्रिय भजन सुनाए
इस मौके पर शर्मिष्ठा बनर्जी ने संगीत की धुन पर गांधीजी का प्रिय भजन वैष्णव जन तो तेने कहिये के बाद साहिर लुधयानवी का गीत सर झुकाने से कुछ नहीं होगा और नीरज की गजल अब तो कोई ऐसा मजहब चलाया जाए सुनाकर खूब दाद बटोरी। अतिथि स्वागत फादर पायस, सुभाष रानाडे, योगेंद्र महावर ने किया। मिलिंद रावल, अशोक दुबे, रुद्रपाल यादव ने प्रतिक चिन्ह प्रदान किए। कार्यक्रम का संचालन विवेक मेहता ने किया। आभार माना श्याम सुंदर यादव ने। इस मौके पर पदमश्री जनक पलटा राहुल निहोरे, शफी शेख, राम बाबू अग्रवाल, रामेश्वर गुप्ता सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
