Dhar Bhojshala: धार भोजशाला फिर विवादों में, एक ही रास्ता, नक्शा तय नहीं होने से बढ़ी उलझन
धार भोजशाला एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद जहां विवाद के खत्म होने की उम्मीद जगी थी, वहीं अब पूजा और नमाज़ के लिए एक ही रास्ते के इस्तेमाल, संरक्षित स्मारक की सीमा स्पष्ट नहीं होने को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
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धार भोजशाला को हाईकोर्ट ने हिंदू मंदिर मानते हुए फैसला दिया तो लगा था कि बरसों का विवाद अब समाप्त हो गया, लेकिन धार भोजशाला फिर चर्चा में है और ताजा विवाद नमाज़ और पूजा के लिए दोनों समाजों द्वारा एक ही रास्ते का उपयोग और संरक्षित स्मारक की सीमा तय नहीं होने से जुड़ा है। हिंदू पक्ष ने इस मामले में पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग को घेरा, क्योंकि भोजशाला परिसर उनके अधीन है। अफसरों के रवैए से नाराज़ हिंदू संगठन ने मंगलवार को धार बंद करने की घोषणा भी की है। माना जा रहा है कि यह विवाद फिर बढ़ता जाएगा।
हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के प्रदेश उपाध्यक्ष आशीष गोयल का कहना है कि एएसआई और प्रशासन हाईकोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन नहीं कर रहा है। संरक्षित स्मारक की सीमा स्पष्ट नहीं की जा रही है। हाईकोर्ट ने हिंदू परिवारों को 365 दिन पूजा का अधिकार दिया है और भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर माना है।
गोयल ने कहा कि एएसआई द्वारा भोजशाला को प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल एवं अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित स्मारक माना गया है। ऐसे में संरक्षित स्मारक की वास्तविक सीमा, स्वामित्व क्षेत्र तथा आने-जाने के मार्ग को स्पष्ट रूप से मानचित्र के माध्यम से प्रदर्शित किया जाना चाहिए, ताकि लोगों को वास्तविक स्थिति की जानकारी मिल सके। यदि किसी मार्ग को धार्मिक गतिविधि के लिए निर्धारित किया गया है तो उस मार्ग पर अन्य गतिविधियों एवं आवाजाही को लेकर भी एएसआई को स्पष्ट स्थिति सामने रखनी चाहिए।
सरस्वती लोक का निर्माण भी शुरू नहीं
हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद पहली बार जब मुख्यमंत्री मोहन यादव धार गए थे तो उन्होंने भोजशाला को सरस्वती लोक बनाने की घोषणा की थी। बाद में कैबिनेट बैठक में सरस्वती लोक की मंजूरी दी गई, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हो पाया। इस बीच मुस्लिम पक्ष की तरफ से तीन याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में लग गईं और फिर सुनवाई शुरू हो गई। सरस्वती लोक का निर्माण शुरू नहीं होने के कारण भी हिंदू संगठन नाराज़ है। वे चाहते थे कि लोक का निर्माण शुरू हो और भोजशाला परिसर में जो अतिक्रमण है, उस पर फैसला लिया जाए, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई को निर्देश दिए कि भोजशाला एएसआई के स्वामित्व की भूमि है। वहां किसी भी तरह का निर्माण अनुमति के बगैर नहीं होना चाहिए।
