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Indore news:दस वर्षीय सिद्धम बना श्री चंद्रसागर महाराज, मां की गोद में सुनी लोरी, बहनों से बंधवाई राखी, फिर चला संयम मार्ग पर

Mon, 16 May 2022 06:02 PM IST
चंद्रप्रकाश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर Published by: चंद्रप्रकाश शर्मा Updated Mon, 16 May 2022 06:02 PM IST
सार

दस साल का सिद्धम जैन अब श्री चंद्रसागर महाराज बन गया है। रविवार को उसकी दीक्षा हुई और नया नाम मिला। सांसारिक जीवन छोड़ संयम मार्ग पर चला। आखिरी बार मां की गोद में लोरी सुनी और बहनों से राखी बंधवाई। केक काटकर खाया और ज्यूस पीया। 

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Indore news: Ten year old Siddham became Shri Chandrasagar Maharaj, listened to lullaby in mother's lap, tied Rakhi with sisters, then walked on the path of restraint
दीक्षा के दौरान हुआ केश लोच और धारण किए मुनि वस्त्र - फोटो : सोशल मीडिया
दस साल का सिद्ध जैन अब श्री चंद्रसागर महाराज बन गया है। संसार को छोड़ वैराग्य की राह पर चल पड़ा। शनिवार को संसार में सिद्धम का आखिरी दिन रहा, जिसके बाद रविवार से वैराग्य जीवन शुरू हुआ। हिंकारगिरी में आचार्य श्री जिनचंद्र सागर सुरीश्वरजी महाराज के सान्निध्य में आयोजित आठ दिवसीय दीक्षा समारोह में सिद्धम को दीक्षा दिलाई गई। दीक्षा ग्रहण करने से पहले सिद्धम ने अपने परिवार के साथ अंतिम शाम बिताई। शाम को उसने केक काटा, फिर बहनों से राखी बंधवाई, मां से लोरी सुनी और उसके बाद संयम के मार्ग की ओर प्रस्थान कर लिया।
Indore news: Ten year old Siddham became Shri Chandrasagar Maharaj, listened to lullaby in mother's lap, tied Rakhi with sisters, then walked on the path of restraint
मां की गोद में लेटकर सिद्धम ने सुनी लोरी - फोटो : सोशल मीडिया
शनिवार शाम को सिद्धम का अपने परिवार के साथ अंतिम सांसारिक भोज हुआ। इस भोज में सिद्धम ने अपनी पसंद के अनुसार केक मंगवाया, काटा और फिर खाया। उसे उसकी मां प्रियंका जैन और अन्य रिश्तेदारों ने केक खिलाया। इसके बाद सिद्धम को अलग-अलग तरह के ज्यूस पिलाए गए क्योंकि उसे ज्यूस का बहुत शौक है। इसके बाद फिर सिद्धम ने अपनी चचेरी बहनों से अंतिम बार राखी बंधवाई। इन बहनों ने उत्साह के साथ संयम के मार्ग की ओर जाने के लिए अग्रसर अपने भाई सिद्धम को राखी बांधी। बाद में सिद्धम अपनी मां के पास पहुंचा। मां ने अपनी गोद में बेटे का सिर रख कर उसे सुलाने की कोशिश की और उसे लोरी सुनाई । श्री नवकार परिवार के प्रवीण गुरुजी, महेंद्र गुरुजी व सोमिल कोठारी ने बताया कि इसके बाद रात को बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में सिद्धम जैन के संयम के मार्ग की ओर अग्रसर होने के उपलक्ष्य में भक्ति संगीत का कार्यक्रम रखा गया था। रात को इस कार्यक्रम में कमल पुष्प में बैठकर सिद्धम ने संयम के मार्ग की ओर अपना कदम बढ़ाया।
Indore news: Ten year old Siddham became Shri Chandrasagar Maharaj, listened to lullaby in mother's lap, tied Rakhi with sisters, then walked on the path of restraint
बहनों से बंधवाई सिद्धम ने राखी - फोटो : सोशल मीडिया
रविवार को साढ़े छह घंटे की प्रक्रिया के बाद सिद्धम श्री चंद्रसागर महाराज बन गया। दीक्षा लेने के लिए सिद्धम नाचते हुए पंडाल में पहुंचा। इसमें सबसे पहले सिद्धम ने 1 घंटे तक प्रतिक्रमण किया। इस प्रतिक्रमण में अपने अब तक के जीवन में किए गए पाप कर्मों के लिए क्षमा मांगी जाती है। इसके बाद मंदिर में स्नात्र पूजा की गई। जिस तरह से बेटी विवाह के बाद घर छोड़कर जाती है तो उसकी दहलीज छुडाई जाती है उसी तरह से सिद्धम की भी सुबह घर की दहलीज छुड़ाई गई।
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दीक्षा के बाद बन गया श्री चंद्रसागर महाराज - फोटो : सोशल मीडिया
आयोजन स्थल के मंदिर से आयोजन के पंडाल तक सिद्धम की वर्षीदान यात्रा निकाली गई। इस छोटी सी यात्रा में एक बार फिर सिद्धम ने श्रद्धालुओं के बीच सांसारिक वस्तुएं लुटाई। यह वस्तुएं लुटाते हुए उसने दीक्षा के पंडाल में प्रवेश किया। फिर एक घंटे तक दीक्षा का क्रम चला। समस्त मंत्र उच्चार के पश्चात आचार्य द्वारा भगवान के सामने सिद्धम को रजोहरण दिया गया तो सिद्धम खुशी से नाचने झूमने लगा। इसके बाद में इस सिद्धम के कपड़े बदले गए। उसे इस जीवन का अंतिम बार का स्नान कराकर विजय तिलक लगाया गया। फिर केश लोच हुआ। 
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श्री चंद्रसागर महाराज बनने के बाद दर्शन के लिए उमड़े लोग - फोटो : सोशल मीडिया
संत के कपड़े पहन कर जब वह दीक्षा पंडाल में पहुंचा तो उसके दर्शन के लिए लोग लालायित हुए। इसके बाद आचार्य भगवंत द्वारा उसे प्रतिज्ञा दिलाई गई कि वह कठिन साधु जीवन जिएगा, साधु चर्या का पालन करेगा, जीवन में हमेशा पैदल चलेगा, रात्रि में पानी का निषेध रहेगा, हाथों से भोजन करेगा, जीवन में कभी स्नान नहीं करेगा, किसी वाहन का उपयोग नहीं करेगा और बिजली का उपयोग नहीं करेगा। इस दौरान अक्षत की वर्षा कर शुभकामनाएं व्यक्त की गई।
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