मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को वीर बाल दिवस पर भोपाल के नानकसर गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम में शिरकत की। इस दौरान सिख समुदाय के लोगों ने मुख्यमंत्री से गुरुद्वारे के पास बार-होटल संचालित होने की शिकायत की थी। कुछ ही समय में एक्शन हो गया और बार-होटल सील कर दिया गया।
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नानकसर गुरुद्वारे में आयोजित कार्यक्रम में कहा कि सच्चा वीर बाल दिवस आज ही है। पूरे परिवार ने एक सप्ताह के अंदर ही देश, धर्म व संस्कृति के लिए अपनी शहादत दी थी। बचपन में मैंने छोटे साहिबजादों के बलिदान की कविता पढ़ी थी। उन्होंने अपना धर्म नहीं बदला, सिद्धांतों से समझौता नहीं किया। नवाब वजीर खान और उनके काजी ने दोनों साहिबजादों को दीवार में चुनवाने का फतवा दिया तो दोनों एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराते रहे। डर व भय कभी भी उनके चेहरे पर नहीं आया।
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गुरुद्वारे में सिख समुदाय की शिकायत मिलने के कुछ ही देर बाद पास में चल रहे बार-होटल को सील कर दिया।
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मुख्यमंत्री ने सुनाई कविता
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने साहिबजादों की शहादत को नमन करते हुए एक कविता भी सुनाई। उन्होंने कहा कि ‘कहीं पर्वत झुके भी है, कहीं दरिया रुकी भी है। नहीं झुकती जवानी है, नहीं रूकती रवानी है। गुरु गोविन्द के बच्चे, उम्र में थे अभी कच्चे। पर वे सिंह बच्चे, धर्म ईमान के सच्चे। गरज कर बोल उठे वे यो, सिंह मुख खोलते थे ज्यों।’ कार्यक्रम के बाद मीडिया से बातचीत में शिवराज ने कहा कि “श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने देश व धर्म की रक्षा की खातिर अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। वह खुद तो लड़े ही, उनके चारों साहबजादे भी शहीद हुए। दो छोटे साहबजादों को धर्म न बदलने के कारण दीवार में चुनवा दिया गया। उनकी शहादत को मैं नमन करता हूं।
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शिवराज सिंह चौहान ने गुरुद्वारे में संबोधित किया।
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दीवार में चुनने के दृश्य को पार्क में उकेरेंगे
मुख्यमंत्री ने कहा कि सचमुच में आज का दिन वीर बाल दिवस है। असली बाल दिवस है। इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तय किया और मध्यप्रदेश में हमने भी तय किया कि 21 से लेकर 26 जनवरी तक हर साल वीर बाल दिवस मनाया जाएगा। बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी के दीवार में चुनने के दृश्य को एक पार्क में उकेरा जायेगा, ताकि लोग उसे देखकर उनके बलिदान को याद करें। ऐसा लग रहा है कि जैसे आज भी साहिबजादे बाबा जोरावर सिंह जी और बाबा फतेह सिंह जी हमारे बीच हैं। हमारे बच्चों के बीच हैं। आज भी उनका शौर्य, उनका साहस विद्यमान है।