शिक्षाविद् और वैज्ञानिक डॉ. भरत राज सिंह लखनऊ के ज्ञान को अमेरिका तक पहुंचा रहे हैं। डॉ. सिंह के आर्टिकल को यूएस के स्कूलों के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। पर्यावरण पर उनके आर्टिकल को एक चेप्टर के रूप में कक्षा 9-12 के छात्रों के लिए लागू पुस्तक ‘द मेल्टिंग ऑफ ग्लेशियर कैन नॉट बी रिवर्स्ड विद् ग्लोबल वार्मिंग’ में शामिल कर पढ़ाया जा रहा है।
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हवा से चलने वाली बाइक बनाकर चर्चा में आए डॉ. भरत, अमेरिकी भी पढ़ते हैं उनके लिखे चैप्टर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 14 Sep 2018 03:54 PM IST
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वैज्ञानिक डॉ. भरत राज सिंह
- फोटो : amar ujala
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वैज्ञानिक डॉ. भरत राज सिंह
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हवा से चलने वाली बाइक बनाने के इनोवेशन से चर्चा में आए डॉ. सिंह वर्तमान में स्कूल ऑफ मैनेजमेंट साइंसेज, लखनऊ के निदेशक हैं। एचबीटीआई कानपुर के फैकल्टी रहे प्रो. आेंकार सिंह के साथ उन्होंने ‘कैन ग्लेशियर एंड आइसमेल्ट बी रिवर्स्ड’ किताब लिखी थी। इस किताब में शामिल आर्टिकल को ही ‘द मेल्टिंग ऑफ ग्लेशियर कैन नॉट बी रिवर्स्ड विद् ग्लोबल वार्मिंग’ में शामिल किया गया है। इस पुस्तक को पहले ही लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड-2015 में शामिल किया जा चुका है। अपने काम के लिए उन्हें कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं।
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जूट के थैले बांटकर कर रहे जागरूक
पर्यावरण को लेकर डॉ. सिंह हमेशा काम करते रहते हैं। यही वजह रही कि उन्होंने पेट्रोल की जगह हवा से चलने वाली बाइक बनाई। इस तकनीक को वह लगातार बेहतर बना रहे हैं। इसके अलावा पॉलिथिन कैरी बैग के उपयोग को बंद करने के लिए उनका प्रयास लगातार चल रहा है। वह खुद अपने खर्च पर जूट के बैग बनवाते हैं। इसके बाद इन्हें लोगों को बांटकर वह पॉलीथिन जैसी खतरनाक समस्या को पैदा होने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। सैकड़ों लोगों को वह अब तक अपने जूट के बैग बांट चुके हैं।
पर्यावरण को लेकर डॉ. सिंह हमेशा काम करते रहते हैं। यही वजह रही कि उन्होंने पेट्रोल की जगह हवा से चलने वाली बाइक बनाई। इस तकनीक को वह लगातार बेहतर बना रहे हैं। इसके अलावा पॉलिथिन कैरी बैग के उपयोग को बंद करने के लिए उनका प्रयास लगातार चल रहा है। वह खुद अपने खर्च पर जूट के बैग बनवाते हैं। इसके बाद इन्हें लोगों को बांटकर वह पॉलीथिन जैसी खतरनाक समस्या को पैदा होने से रोकने का प्रयास कर रहे हैं। सैकड़ों लोगों को वह अब तक अपने जूट के बैग बांट चुके हैं।
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जागरूकता की शुरुआत अपने घर से
सौर ऊर्जा के उपयोग पर भी उन्होंने काम शुरू किया। उनका कहना है कि दूसरों को समझाने से बेहतर था कि पहले खुद इसका शुरू किया जाए। इसके लिए अपने विरामखंड स्थित घर की छत पर ही सोलर पैनल लगवाए। अपने घर की जरूरत पूरी करने के लिए पांच किलोवाट क्षमता का प्लांट लगाया। अब दूसरे लोगों को अपने प्लांट के फायदे बताकर उन्हें भी इसका उपयोग करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
सौर ऊर्जा के उपयोग पर भी उन्होंने काम शुरू किया। उनका कहना है कि दूसरों को समझाने से बेहतर था कि पहले खुद इसका शुरू किया जाए। इसके लिए अपने विरामखंड स्थित घर की छत पर ही सोलर पैनल लगवाए। अपने घर की जरूरत पूरी करने के लिए पांच किलोवाट क्षमता का प्लांट लगाया। अब दूसरे लोगों को अपने प्लांट के फायदे बताकर उन्हें भी इसका उपयोग करने के लिए जागरूक कर रहे हैं।
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वैदिक काल पर भी शोध
डॉ. सिंह का कहना है कि रामायण काल में पाताल लोक का जिक्र है। हालिया शोध से यह पता चला है कि यह केवल कल्पना नहीं है। इसके पीछे कुछ तो सच्चाई है। मध्य अमेरिका के होंडुरस में एक गुप प्राचीन शहर की खोज हुई है। लिडार तकनीक से इस शहर सियूदाद ब्लांका की खोज हुई है। यहां हनुमान के जैसे वानर देवता की मूर्तियां भी मिली हैं। इतिहासकारों का भी आकलन है कि यहां के लोग किसी विशालकाय वानर देवता की प्रार्थना किया करते थे। यहां घुटनों के बल बैठी हुई मूर्ति हनुमान की याद दिलाती है।
डॉ. सिंह का कहना है कि रामायण काल में पाताल लोक का जिक्र है। हालिया शोध से यह पता चला है कि यह केवल कल्पना नहीं है। इसके पीछे कुछ तो सच्चाई है। मध्य अमेरिका के होंडुरस में एक गुप प्राचीन शहर की खोज हुई है। लिडार तकनीक से इस शहर सियूदाद ब्लांका की खोज हुई है। यहां हनुमान के जैसे वानर देवता की मूर्तियां भी मिली हैं। इतिहासकारों का भी आकलन है कि यहां के लोग किसी विशालकाय वानर देवता की प्रार्थना किया करते थे। यहां घुटनों के बल बैठी हुई मूर्ति हनुमान की याद दिलाती है।