मोहम्मद तौफीक ने उर्दू विषय में हासिल किए शत प्रतिशत नंबर, रचा इतिहास
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लखनऊ विश्वविद्यालय ने दीक्षांत समारोह में 15 मेडल देने के बाद बचे हुए मेडल विजेताओं के नाम घोषित कर दिए हैं। इनमें से सबसे ज्यादा चौंकाने वाला नाम उर्दू विभाग में दिया जाने वाला चकबस्त मेडल है। इस मेडल को जीतने वाले तौफीक ने अंतिम वर्ष की परीक्षा में कुल मिलाकर 300 में से 298 नंबर हासिल किए हैं। उर्दू के अलावा उनका दूसरा विषय पर्शियन है, जिसमें उन्होंने 150 में से 148 नंबर हासिल किए हैं। तौफीक के अनुसार इस साल परीक्षा ओएमआर पर हुई थी। इसका भी उन्हें काफी फायदा मिला। इसके बावजूद शत प्रतिशत नंबर हासिल करना कहीं से भी आसान काम नहीं है। ओएमआर पर परीक्षा अंतिम वर्ष के सभी विद्यार्थियों की हुई है, लेकिन 80 फीसदी से ज्यादा नंबर लाने विद्यार्थी नाम के ही हैं। 100 प्रतिशत नंबर लाने वाले विद्यार्थी इस बार ही नहीं लविवि के इतिहास में पहली बार हुआ है।
तौफीक मूल रूप से गोंडा के रहने वाले हैं। उनके पिता मो. सलीम की मृत्यु वर्ष 2012 में हो गई थी। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले तौफीक की मां मुन्नी के साथ चार अन्य भाई रहते हैं। घर की हालत बहुत अच्छी न होने की वजह से तौफीक अपना खर्च ट्यूशन पढ़ाकर निकालते हैं। उनके अनुसार एमए उर्दू में दाखिला लेकर वे इसी में शोध करना चाहते हैं।
लखनऊ विश्वविद्यालय में दिया जाने वाला उर्दू विभाग का दूसरा मेडल वाइस चांसलर गोल्ड मेडल मो. कासिम के हिस्से में आया है। कासिम ने इस साल परास्नातक स्तर पर उर्दू में टॉप किया है। उनमें 82.45 प्रतिशत नंबर हैं। कासिम के पिता वसीम हैदर सेवानिवृत्त वकील हैं जबकि मां सबरे जहां गृहिणी हैं।
मनोविज्ञान विभाग में टॉप करने पर प्रीति जोशी को श्रीमदन गोपाल अग्रवाल मेमोरियल गोल्ड मेडल दिया जाएगा। प्रीति ने एमए मनोविज्ञान में 77 प्रतिशत नंबर हासिल किए हैं। प्रीति के पिता बैंक मैनेजर मां ग्रहिणी है। प्रीति आगे चलकर शोध में अपना कॅरिअर बनाना चाहती हैं। उनके अनुसार ही प्रोफेसर बनना सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। प्रोफेसर बनने की साथ ही प्रीति मानसिक स्वास्थ्य पर बराबर काम करना चाहती हैं।