लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें डीके राय की अलग पहचान थी। उन्होंने कानून के आदर्शों का पालन किया और उसूलों व सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
इन अफसर ने मंत्री के खिलाफ मुकदमा लिखवा की थी गिरफ्तारी, सम्मान के लिए सीएम से भी ले लिया मोर्चा
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राजधानी के इतिहास में डिप्टी एसपी के पद पर तैनात रहे अफसरों में शायद ही कोई डीके राय जैसा हिम्मतवाला रहा हो। वर्ष 2006 बैच के पीपीएस अधिकारी डीके राय ने समाजवादी पार्टी की सरकार में दबंग और रसूखदार मंत्री के खिलाफ न सिर्फ मुकदमा दर्ज किया बल्कि उन्हें हजारों लोगों के बीच से गिरफ्तार करके भी ले गए। खास बात यह है कि मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने से पहले उन्होंने आईजी-डीआईजी तो दूर एसएसपी और एएसपी ट्रांस गोमती तक को भनक नहीं लगने दी। उस वक्त डीके राय महानगर सीओ के पद पर तैनात थे और माहौल निकाय चुनाव का था। हसनगंज निवासी सपा सरकार के खास मंत्री पर विपक्षी प्रत्याशी को अगवा करने के आरोप में शिकायत आई तो उन्होंने तुरंत कार्रवाई की ठान ली।
हसनगंज के तत्कालीन थाना प्रभारी से मंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने को कहा और इस खबर को दो-तीन घंटे तक अधिकारियों को पता चलने से रुकवा दिया। इसके बाद वह दल-बल लेकर मंत्री की तलाश में क्षेत्र में निकल गए। एक जगह पर मंत्री बैठे दिखे तो उनके पास जाकर मुकदमा दर्ज होने और गिरफ्तार करने की बात कही। मंत्री यह सुनते ही सकपका गए और अपने समर्थकों को बुलवा लिया। हालांकि, सीओ डीके राय न घबराए न ही दबाव में आए। समर्थक नारेबाजी और हंगामा करने लगे तब भी उन पर असर नहीं पड़ा और मंत्री को जीप में बैठाकर ले गए।
खाकी के सम्मान के लिए मुख्यमंत्री से भी ले लिया मोर्चा
जुलाई 2007 में मायावती के शासनकाल में डीके राय और उनकी टीम चित्रकूट में कुख्यात दस्यु सरगना ठोकिया की तलाश कर रही थी तभी उसने पुलिस पार्टी को घेरकर हमला कर दिया। सात घंटे तक दोनों के बीच फायरिंग होती रही और डीके राय मदद के लिए आईजी से लेकर एसएसपी तक से संपर्क करते रहे। हालांकि, कोई मदद को नहीं आया और ठोकिया ने चार पुलिसकर्मियों को मार डाला। मुख्यमंत्री ने डीके राय को किसी अधिकारी को सूचना दिए बगैर ठोकिया की तलाश में जाने के आरोप में सस्पेंड कर दिया था। गलत आरोप लगाने पर डीके राय ने उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया। हजरतगंज कोतवाली में एफआईआर कराने की कोशिश की। पुलिस के हाथ खड़े करने पर वह कोर्ट गए। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को उन्हें बहाल करने का आदेश देते हुए तीन लाख रुपये जुर्माना लगाया था। आज भी वह मायावती समेत उस वक्त डीजीपी, प्रमुख सचिव गृह समेत अन्य अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के लिए पैरवी कर रहे हैं।
सर्किल अफसर होकर भी साइकिल से करते थे गश्त
डीके राय जब चौक सर्किल के सीओ थे तो साइकिल से गश्त करते थे। अक्सर वह अपने ऑफिस से साइकिल लेकर गश्त के लिए निकल जाते थे। चौक की तंग गलियों में सीओ को साइकिल पर देखकर लोगों की भीड़ लग जाती थी। कई दफा तो लोग उनके साथ-साथ चलने या दौड़ने लगते थे। इस दौरान उनके हमराह और चालक की मुसीबत हो जाती थी। उन्हें भी साइकिल, बाइक या स्कूटर लेकर पीछे-पीछे चलना पड़ता था।