लखनऊ पुलिस का इतिहास कई रोमांचक किस्सों और जांबाजी से भरा हुआ है। यहां के अनेक पुलिस अफसर अपने काम से सुर्खियों में रहे और नागरिकों का विश्वास जीता। इनमें बृजेश कुमार मिश्रा की अलग पहचान थी। उन्होंने राजधानी की ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने के लिए उल्लेखनीय योगदान दिया।
राजधानी की बदहाल यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए एएसपी बृजेश मिश्रा ने बेहतरीन काम किए थे। वर्ष 2014 में राजधानी के एएएपी ट्रैफिक की कुर्सी संभालने के बाद उन्होंने ‘ऑपरेशन क्लीन’ की शुरुआत की। इस ऑपरेशन में प्रमुख बाजारों और चौराहों से लेकर गली-मुहल्लों तक सड़क किनारे सजी दुकानें हटवाकर यातायात को रफ्तार को दी थी।
वर्ष 1993 बैच के पीपीएस अधिकारी बृजेश मिश्रा पहले ऐसे एएसपी ट्रैफिक थे जिन्होंने अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ विधिक कार्रवाई शुरू की थी। उन्होंने ऐसे होटल व रेस्टोरेंट चिह्नित किए, जहां आने-जाने वाले लोग अपने वाहन सड़क पर पार्क करते थे या फिर उन्होंने सड़क पर अपने काउंटर या बूथ सजा रखे थे। ऐसे होटल व रेस्टोरेंट संचालकों को उन्होंने पुलिस एक्ट के तहत नोटिस भेजने शुरू किए।
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पीपीएस बृजेश कुमार मिश्रा
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कुछ प्रतिष्ठानों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज कराई थी। हमेशा जाम और अतिक्रमण से जूझने वाले पॉलीटेक्निक चौराहा, मुंशी पुलिया, टेढ़ी पुलिया और तेलीबाग जैसे चौराहों पर उनके प्रयासों से ही यातायात सुव्यवस्थित हो सका था। डालीगंज में बरसों से बंद पुल से अतिक्रमण हटवाकर यातायात संचालन शुरू कराना उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि थी। उक्त पुल पर फल व सब्जी दुकानदारों ने कब्जा कर रखा था।
अतिक्रमण न हटने पर चौकी प्रभारियों के खिलाफ दी थी रिपोर्ट
अतिक्रमण के लिए जिम्मेदार चौकी प्रभारियों के प्रति एएसपी बृजेश मिश्रा का रुख काफी सख्त था। राजधानी में पहली बार उन्होंने डालीबाग और तेलीबाग समेत कई चौकी के प्रभारियों के खिलाफ तत्कालीन एसएसपी को रिपोर्ट दी थी। उनकी रिपोर्ट पर चौकी प्रभारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया था। एएसपी की सख्ती के बाद राजधानी के अन्य चौकी प्रभारियों ने अपने इलाके से अतिक्रमण हटवाना शुरू किया था।