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इन युवतियों ने नहीं मानी हार, जीवन की सबसे बड़ी कमी को बनाया अपनी ताकत और पहुंचीं इस मुकाम पर

Wed, 02 Oct 2019 04:43 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Amulya Rastogi Updated Wed, 02 Oct 2019 04:43 PM IST
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inspirational story of district youth coordinator pushpa and training and placement officer rani
पुष्पा और रानी - फोटो : amar ujala

एक के हाथ जन्म से ही अविकसित रह गए तो दूसरी के दोनों हाथ एक एक्सीडेंट ने छीन लिए। जीवन की इस सबसे बड़ी कमी को दोनों ने अपनी ताकत बनाया और खुद को एक मुकाम तक पहुंचाने में कामयाब रहीं। ये शक्ति स्वरूपा हैं नेहरू युवा केंद्र लखनऊ की जिला युवा समन्वयक पुष्पा और एकेटीयू की ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट ऑफिसर रानी वर्मा।



 

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पुष्पा - फोटो : amar ujala
पुष्पा कहती हैं कि मम्मी मेरी सबसे बड़ी ताकत बनीं। मैं सब बच्चों को हाथ से सामान्य तरीके से काम करता देखती तो निराश होती थी, मम्मी ने मुझे सिखाया कि कमियों पर कैसे विजय हासिल की जाती है। धीरे-धीरे मैं पैर से लिखने लगी और पैर ही मेरे हाथों का काम करने लगे हैं।
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पुष्पा - फोटो : amar ujala
पुष्पा कहती हैं कि जिस पद पर हूं, वहां मुझे युवाओं का भविष्य तराशने, उनके लिए संभावनाएं विकसित करने की जिम्मेदारी मिली है और यह एक चुनौती भी है मेरे लिए जिसे हर हाल में जीतना है।
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रानी - फोटो : amar ujala
रानी कहती हैं कि मैं कक्षा 6 में पढ़ती थी जब एक्सीडेंट में मेरे दोनों हाथ चले गए। हमारे आर्थिक हालात भी बहुत खराब थे। मां जानती थी कि मुझे पढ़ना अच्छा लगता है। उन्होंने न सिर्फ मुझे पैरों से लिखना सिखाया, बल्कि तंगी में भी मेरी पढ़ाई को कभी बंद नहीं किया।
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रानी - फोटो : amar ujala
बीटेक करने मैं गाजियाबाद गई और फेलोशिप परीक्षा पास करने के कारण मेरी राह आसान हो गई। हां, हाथ न होने के कारण कई बार निराशा हुई लेकिन आज मैं गर्व से कहती हूं कि मैं पैरों से वे सब काम कर लेती हूं, जो हाथ से किए जा सकते हैं।
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