{"_id":"5c0a1ba3bdec22415774efe5","slug":"story-of-mba-students-manija-and-saeed","type":"photo-gallery","status":"publish","title_hn":"लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स कोल्हापुरी चप्पल समेत इन वस्तुओं को विदेशों में दिला रहे पहचान","category":{"title":"Bashindey","title_hn":"बाशिंदे ","slug":"bashindey"}}
लखनऊ यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स कोल्हापुरी चप्पल समेत इन वस्तुओं को विदेशों में दिला रहे पहचान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 07 Dec 2018 12:35 PM IST
विज्ञापन
सईद और मानिजा
- फोटो : amar ujala
लखनऊ यूनिवर्सिटी में प्रबंधन की पढ़ाई करने वाले सईद अहमद का कॉलेज के दिनों में शुरू किया गया प्रयास नागरा, कोल्हापुरी चप्पल और हैंडीक्राफ्ट की वस्तुओं को विदेश में एक नई पहचान दिला रहा है। इंटरनेट के माध्यम से अपने उत्पादों को विदेश में मशहूर बनाने के बाद सईद अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं। उनका कहना है कि अपने प्रयास में सफल रहे तो हैंडीक्राफ्ट कारीगरों को उनकी मेहनत का अच्छा मूल्य मिलेगा और कई लोगों को रोजगार भी दिला पाएंगे।
;चप्पलें
- फोटो : amar ujala
सईद बताते हैं कि कॉलेज के दिनों में आम छात्रों की तरह जरूरी सामानों की खरीदारी के लिए वह भी अमीनाबाद मार्केट जाया करते थे। वर्ष 2015 में अमीनाबाद मार्केट घूमते समय उन्हें अपनी सहपाठी मानिजा फातिमा के साथ कोल्हापुरी चप्पलों को नया डिजाइन देकर उसे देश-विदेश के प्लेटफॉर्म पर उतारने का विचार आया। इसके बाद कोल्हापुरी चप्पल के डिजाइन में बदलाव किया और नए डिजाइन के साथ उसे ऑनलाइन डाला।
चप्पलें
- फोटो : amar ujala
फेसबुक, इंस्ट्राग्राम और वाट्सएप पर उनके इस विचार को काफी प्रोत्साहन मिला। इसके बाद अपना दायरा बढ़ाते हुए नागरा, हेयर बैंड, ईयर रिंग को नए सिरे से डिजाइन कर इंटरनेट पर डाला। अमेरिका और लंदन से इसके लिए काफी रेस्पांस मिला। सईद ने बताया कि पढ़ाई के साथ ही उन्हें कुछ अलग करने का सूझा ताकि वे अपने देश में ही निर्मित उत्पादों को नई व आकर्षक डिजाइन में पिरोकर उन लोगों के सामने पेश कर सकें जो अब तक इन उत्पादों से अछूते हैं। अपने उत्पादों को लेकर मानिजा फातिमा और सईद विभिन्न मेलों में अपने स्टाल भी लगाते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
चप्पलें
- फोटो : amar ujala
भरोसा नहीं था इतना पसंद किया जाएगा काम
सईद के अनुसार, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका काम इतना पसंद किया जाएगा। विदेशों से इन सामान की मांग आती है। कोई सहयोग न होने की वजह से वे इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। इसलिए पढ़ाई पूरी कर अब वे स्टार्टअप स्थापित करना चाहते हैं।
सईद के अनुसार, उन्हें उम्मीद नहीं थी कि उनका काम इतना पसंद किया जाएगा। विदेशों से इन सामान की मांग आती है। कोई सहयोग न होने की वजह से वे इसे पूरा नहीं कर पाते हैं। इसलिए पढ़ाई पूरी कर अब वे स्टार्टअप स्थापित करना चाहते हैं।
विज्ञापन
चप्पलें
- फोटो : amar ujala
इसके लिए हैंडीक्राफ्ट कारीगरों की टीम तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं। इससे वे हैंडीक्राफ्ट सामान को देश व विदेशों में पहचान दिला सकेंगे और कई लोगों को रोजगार भी दे सकेंगे।