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भाई ने पढ़ाई छोड़ी, मां ने भैंसे पाली और बेटी को बनाया 'चैंपियन'...गजब का जज्बा

Sat, 24 Nov 2018 10:46 AM IST
शिव कुमार, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा)
शिव कुमार, अमर उजाला, भिवानी (हरियाणा) Updated Sat, 24 Nov 2018 10:46 AM IST
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chandigarh success story of Boxer Sonia Chahal
सोनिया चहल

भाई ने पढ़ाई छोड़ी और मां ने भैंसे पाली और बेटी को ऐसे मुकाम पर पहुंचाया कि आज पूरी दुनिया सराह रही है...पढ़ें महिला मुक्केबाज सोनिया चहल की संघर्ष की कहानी


 

chandigarh success story of Boxer Sonia Chahal
सोनिया चहल

दिल्ली में चल रही वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंची सोनिया चहल के खेल के लिए भाई ने पढ़ाई छोड़ी तो पिता ने खर्च के लिए ठेके पर खेती की। मां ने भैंसों का काम संभाला और दूध की बिक्री की। इस बीच सोनिया जी-जान से अभ्यास में लगी रही। इनकी सामूहिक परिश्रम और त्याग व जुनून का प्रतिफल है कि सोनिया सोने के तमगे से एक कदम दूर हैं, लेकिन चांदी पक्की कर चुकी हैं।
 

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सोनिया चहल - फोटो : ANI

एमडीयू से बीए फाइनल की पढ़ाई कर रही सोनिया ने 2012 में बॉक्सिंग खेल को अपनाया। चार साल परिवार को आर्थिक तंगी ने परेशान किया, लेकिन सभी सदस्यों ने मिलकर सामना किया। भाई सुमित ने नौवीं की पढ़ाई छोड़कर पिता जय भगवान का खेतीबाड़ी में हाथ बंटाना शुरू किया। स्वयं के खेत कम पड़े तो ठेके पर जमीन ली। 

पहले घर में एक भैंस थी। बाद में भैंसों की संख्या बढ़ाकर दूध बेचना शुरू किया और घर की आर्थिक स्थिति को सुधारने का प्रयास किया। सोनिया की रेलवे में नौकरी लगने और सरकार की ओर से मदद मिलने के बाद हालात सुधर गए हैं। सुमित बताते हैं कि सोनिया के जज्बे को देखते हुए परिवार ने उन्हें पूरा सहयोग और समर्थन दिया। सोनिया ने भी निराश नहीं किया।

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सोनिया चहल

छह साल से कड़ी मेहनत से चांदी पक्की
सोनिया ने साल 2012 में बॉक्सिंग कॅरियर की शुरुआत की। छह साल की कड़ी मेहनत का परिणाम है कि वह सीनियर वर्ल्ड बॉक्सिंग चैंपियशिप के फाइनल में पहुंच चुकी हैं और चांदी पक्की कर चुकी हैं। सोनिया ने पहले भी शानदार प्रदर्शन किया है। तुर्की में हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में ब्रांज मेडल जीता था। हरिद्वार में हुए सीनियर नेशनल 2016 में गोल्ड मेडल और 2014 में स्कूल नेशनल में गोल्ड मेडल जीता है।

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सोनिया चहल

सोनिया के पंच पर झूम रहे थे परिजन
दिल्ली में चल रही वर्ल्ड चैंपियनशिप में सोनिया पंच बरसा रही थी और नीमड़ी गांव में परिजन झूम रहे थे। सोनिया ने जैसे ही प्रतिद्वंद्वी को हराकर फाइनल में प्रवेश किया परिवार खुशी मनाने लगा। 57 किलोभार वर्ग में खेलने वाली सोनिया शनिवार शाम करीब चार बजे फाइनल मुकाबले के लिए रिंग में उतरेगी। सोनिया ने सेमीफाइनल में डीपीआर कोरिया की खिलाड़ी को मात दी। इससे पहले क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड चैंपियन को मात दी।

सोनिया ने शानदार प्रदर्शन किया है। हमें पूरी उम्मीद है कि दिल्ली से गोल्ड मेडल जीतकर ही लौटेंगे। वर्ल्ड चैंपियन को शानदार तरीके से सोनिया ने हराया। - जगदीश सिंह, कोच द्रोणाचार्य अवार्डी

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