जीवन में बढ़ रहे तनाव, जीवनशैली और आहार की गड़बड़ी के कारण तमाम तरह की बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है। स्ट्रोक की बढ़ती समस्या को इसी का एक कारण माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्ट्रोक तब होता है जब मस्तिष्क के किसी हिस्से को ऑक्सीजन युक्त रक्त की निरंतर आपूर्ति प्रभावित हो जाती है। आमतौर पर ऐसी स्थिति मस्तिष्क को रक्त की आपूर्ति करने वाले वाहिकाओं में रुकावट के कारण होती है। स्ट्रोक की समस्या कई स्थितियों में जानलेवा भी हो सकती है।
आज का योगासन: स्ट्रोक के खतरे से रहना है सुरक्षित तो यह चार योगासन हैं सबसे बेहतर विकल्प
कपालभाति प्राणायाम
प्राणायाम का अभ्यास करना मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए सबसे आवश्यक माना जाता है। इसमें भी कपालभाति प्राणायाम को विशेष लाभदायक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक स्ट्रोक के खतरे से बचे रहने या स्ट्रोक के शिकार लोगों के लिए रोजाना यह योगाभ्यास बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह मस्तिष्क की कोशिकाओं का स्वस्थ बनाए रखने के साथ रक्त के संचार को बढ़ावा देता है।
भुजंगासन
भुजंगासन या कोबरा पोज उन अभ्यासों में से एक है जो मस्तिष्क के कार्यों को ठीक बनाए रखने में मदद करती हैं। मस्तिष्क की कोशिकाओं को स्वस्थ बनाए रखने और रक्त के संचार को बढ़ाने में इस योगासन को विशेष लाभदायक माना जाता है। याददाश्त से संबंधित दिक्कतों के लिए भी स्वास्थ्य विशेषज्ञ भुजंगासन के अभ्यास की सलाह देते हैं।
ताड़ासन या माउंटेन पोज, शरीर की सभी मांसपेशियों को फैलाती है। मस्तिष्क को स्वस्थ बनाए रखने के लिए भी इस योग के नियमित अभ्यास को लाभदायक माना जाता है। इस योगासन को करने के लिए सबसे पहले एकदम सीधे खड़े हो जाएं, हाथों को एकदम सीधा रखें। गहरी सांस लेते हुए दोनों हाथों को सिर के ऊपर उठाएं और उंगलियों को आपस में जोड़ते हुए स्ट्रेच करें। शरीर का भार पैर की उंगलियों पर रखें। कुछ सेकेंड्स के लिए इस स्थिति में रहें।
धनुरासन
अग्न्याशय सहित पेट की तमाम समस्याओं के खतरे को कम करने के साथ धनुरासन का अभ्यास मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में भी लाभदायक माना जाता है। स्ट्रोक के खतरे से खुद को सुरक्षित रखने के लिए धनुरासन का नियमित अभ्यास करना आपके लिए लाभदायक हो सकता है। इस योग को करने के लिए सबसे पहले आपको पेट के बल लेटना है और अपने घुटनों को अपने कूल्हों की ओर मोड़ना है। अब अपने हाथों से अपने टखनों को पकड़ें। अब अपने पैरों और बाजुओं को जितना हो सके ऊपर उठाएं और अपना चेहरा ऊपर रखें। जब तक आप कर सकते हैं तब तक इस मुद्रा में बने रहने का प्रयास करें।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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