पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) महिलाओं में प्रजनन से संबंधित समस्या है, जिसके लिए हार्मोनल विकारों को प्रमुख कारण माना जाता रहा है। आंकड़ों के मुताबिक देश में हर पांच में से एक महिला पीसीओएस की समस्या से पीड़ित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सही समय पर समस्या का निदान और इसकी जागरूकता बांझपन के जोखिमों से बचा सकती है। यह किशोरावस्था के दौरान होने वाली दिक्कत है, जिसके रोगी तेजी से बढ़ रहे हैं। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी को इसका प्रमुख कारक माना जाता है।
Yoga Tips: हर पांच में से एक महिला PCOS की शिकार, जानिए इसके कारण और किन आसनों से पा सकते हैं लाभ
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पीसीओएस में क्या समस्याएं होती हैं?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पीसीओएस के लक्षणों की समय रहते पहचान करके इसकी जटिलताओं को कम किया जा सकता है। आमतौर पर पीसीओएस की स्थिति में इस प्रकार की दिक्कतों का अनुभव हो सकता है।
- वजन बढ़ना और मोटापे की समस्या।
- अक्सर थकान और ऊर्जा का स्तर कम महसूस होते रहना।
- अनचाहे बालों का बढ़ना। चेहरे, बाहों, छाती, पीठ और पेट पर बालों का विकास होना।
- सिर के बालों का पतला होना या पीसीओएस से संबंधित अचानक बालों का झड़ना।
- हार्मोनल परिवर्तन के कारण मुहांसे की समस्या हो सकती है। इसके अलावा त्वचा पर काले धब्बे दिख सकते हैं।
- मूड में बदलाव, अवसाद और चिंता की समस्या।
प्राणायाम से मिलता है लाभ
प्राणायाम के कई प्रकार के योगासन मस्तिष्क को ऑक्सीजन युक्त रक्त की आपूर्ति बढ़ाने में मदद करते हैं जिससे हार्मोनल संतुलन को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है। कपालभाति, अनुलोम-विलोम प्राणायाम के नियमित अभ्यास की आदत तनाव-चिंता जैसे विकारों को कम करने के साथ पीसीओएस के लक्षणों और जटिलताओं को भी कम करने में विशेष फायदेमंद हो सकती है।
बद्धकोणासान योग का अभ्यास
बद्धकोणासान को बटरफ्लाई पोज के नाम से भी जाना जाता है जो पीसीओएस की समस्या में कारगर योगासनों में से एक है। यह मुद्रा आपके शरीर में आराम को बढ़ावा देने में मदद करती है। इसके अलावा, मासिक धर्म की परेशानी और तनाव से राहत दिलाने में भी इस अभ्यास से विशेष लाभ हो सकता है। बद्धकोणासान योग, यौन स्वास्थ्य को बेहतर रखने और अंगों में रक्त संचार को बढ़ाने के लिए भी फायदेमंद अभ्यास है।
धनुरासन से भी मिलता है आराम
धनुरासन, मासिक धर्म की परेशानी को दूर करने, प्रजनन अंगों को उत्तेजित करने और शारीरिक सक्रियता को बढ़ावा देने वाले कारगर योगासनों में से एक है। इस योग के अभ्यास को पेल्विक क्षेत्र में रक्त परिसंचरण को बढ़ावा देने और पेट के अंगों की मालिश करने में लाभकारी पाया गया है। गर्दन, कंधों और पैरों की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग के साथ धनुरासन योग का अभ्यास पीसीओएस की जटिलताओं को कम करने में फायदेमंद है।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।