पिछले दो साल से दुनियाभर में जारी कोरोना संक्रमण ने लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है। डेल्टा जैसे वैरिएंट से संक्रमण की स्थिति में लोगों को कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिसका स्वास्थ्य पर लंबे समय तक असर हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कोरोना वायरस शरीर के कई अंगों पर नकारात्मक प्रभाव डालता है, यही कारण है कि इससे पोस्ट कोविड की समस्याएं भी लंबे समय तक बनी रह सकती हैं। इन समस्याओं से छुटकारा पाने के लिए लोगों को दैनिक जीवन में योगासनों को शामिल करने से लाभ मिल सकता है।
आज का योग: कोविड के साइड-इफेक्ट्स को कम करने में मददगार हैं ये योगासन, पोस्ट कोविड समस्याएं भी होंगी कम
कपालभाति प्राणायाम
कपालभाति प्राणायाम लंबी सांस लेने और सांस छोड़ने की तकनीक है। यह प्राणायाम आपकी एकाग्रता के स्तर को बढ़ाने और फेफड़ों की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए उत्कृष्ट माना जाता है। शरीर में ऑक्सीजन युक्त रक्त के परिसंचरण को बढ़ावा देने और तनाव-चिंता जैसी समस्याओं को दूर करने में भी इस योग के अभ्यास को लाभदायक माना जाता है।
धनुषासन योग
फेफड़ों को स्वस्थ रखने का सबसे अच्छा तरीका है योग। योग तनाव के स्तर को कम करने के साथ फेफड़ों को मजबूत बनाकर उनकी कार्यक्षमता में सुधार करता है। धनुष मुद्रा या बो पोज योग का नियमित रूप से अभ्यास फेफड़ों की क्षमता में सुधार करता है और वायुमार्ग से बलगम को साफ करने में मदद कर सकता है। कोरोना से ठीक हो चुके लोगों को अपने डॉक्टर की सलाह के आधार पर नियमित रूप से इस योग का अभ्यास जरूर करना चाहिए।
भुजंगासन योग
कोबरा पोज या भुजंगासन योग न केवल मानसिक स्वास्थ्य में सुधार करता है बल्कि या छाती और फेफड़ों को फैलाने में भी मदद करता है। साइटिका की समस्या को कम करने, रीढ़ को मजबूत करने और अस्थमा के लक्षणों से राहत प्रदान करने में भी इस योग को लाभदायक माना जाता है। कोविड संक्रमित रह चुके लोगों के लिए इस योग का नियमित रूप से अभ्यास करना लाभदायक माना जाता है।
------------------
नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।