पाचन स्वास्थ्य को ठीक रखने के लिए लिवर का ठीक रहना बहुत आवश्यक माना जाता है। लिवर, पाचन अंग के रूप में कार्य करता है और शरीर की मेटाबॉलिक प्रक्रियाओं में विशेष भूमिका निभाता है। यह विटामिन्स और खनिजों को संग्रहित करने और कई प्रकार के हार्मोन्स को स्रावित करने में भी भूमिका निभाता है। हालांकि आहार और लाइफस्टाइल से संबंधित कई प्रकार की समस्याओं के कारण लोगों में लिवर की बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इस अंग को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहना चाहिए।
Yoga Tips: लिवर ठीक, तो दूर होंगी पाचन की दिक्कतें, ये योगासन आपके लिए हो सकते हैं बेहद लाभकारी
प्राणायाम योग से लिवर की सेहत को लाभ
प्राणायाम को आमतौर पर मानसिक स्वाथ्य को बेहतर रखने वाले अभ्यास के तौर पर जाना जाता है, पर शोधकर्ताओं ने पाया कि कुछ प्रकार के प्राणायाम योगाभ्यास लिवर विकारों को दूर करने में भी आपके लिए फायदेमंद हो सकते हैं। लिवर सिरोसिस, पीलिया, हेपेटाइटिस और पेट की अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को प्राणायाम से लाभ मिल सकता है।
उदाहरण के लिए कपालभाति प्राणायाम, जिसे योग स्कल शाइनिंग ब्रीदिंग एक्सरसाइज के रूप में भी जाना जाता है, यह व्यायाम लिवर को उत्तेजित करके इससे संबंधित समस्याओं को दूर करने में लाभकारी हो सकती है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन
अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग के अभ्यास की आदत शरीर के लिए कई प्रकार से लाभकारी हो सकती है, इसके अभ्यास के लिवर की समस्याओं में भी कई लाभ हो सकते हैं। लिवर पर दबाव बनाकर फाइब्रोसिस, एपोप्टोसिस, सूजन को कम करने में इस योग के लाभ हो सकते हैं। यह लिवर को मजबूती देने में आपके लिए विशेष लाभकारी अभ्यास है। अर्ध मत्स्येन्द्रासन योग को पाचन और रीढ़ की समस्याओं को कम करने में फायदेमंद पाया गया है।
गोमुखासन योग को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए लाभकारी पाया गया है। इसे सिरोसिस के इलाज के लिए सबसे अच्छे आसनों में से एक माना जाता है। लिवर के कार्यों को बेहतर बनाने के साथ ऑक्सीजनेशन और रक्त प्रवाह को बेहतर करने में भी इस योग से लाभ हो सकता है। लिवर को स्वस्थ रखने के साथ शरीर से विषाक्त पदार्थों और रोगजनक बैक्टीरिया को निकालने में भी इस योगासन के लाभ हो सकते हैं। यह आसन लिवर को उत्तेजित करता है।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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