सर्वाइकल का दर्द, मौजूदा समय की सबसे आम समस्याओं में से एक है। इसके कई कारण हो सकते हैं। शरीर की मुद्रा का सही न होना, सिर को एक ही स्थिति में लंबे समय तक रखने जैसी आदत आपमें सर्वाइकल होने के जोखिम को बढ़ा सकती है। कंप्यूटर पर देर तक काम करते रहने वाले लोगों में भी सर्वाइकल होने का खतरा अधिक पाया गया है। इस समस्या को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है क्योंकि इसमें की गई लापरवाही शरीर के अन्य अंगों जैसे पीठ और कंधों में समस्या का कारण बन सकती है। सर्वाइकल का दर्द समय के साथ इन अंगों में भी बढ़ने लग जाता है।
Yoga Tips: ऐसे लोगों में सर्वाइकल का होता है अधिक खतरा, ये तीन योगासन कर सकते हैं आपकी मदद
मत्स्यासन योग से मिलेगा लाभ
मत्स्यासन या फिश पोज योग के अभ्यास से गर्दन में दर्द की समस्या को कम किया जा सकता है। इस योग में आपके ऊपरी शरीर में खिंचाव के साथ, फेफड़ों में वायुप्रवाह में भी सुधार होता है। डेस्क जॉब के कारण होने वाले सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस की समस्या
के अधिक शिकार होते हैं। शरीर की मुद्रा को सुधारने और गर्दन में होने वाले दर्द की समस्या को कम करने में मत्स्यासन योग के अभ्यास की आदत बनाना आपके लिए विशेष लाभकारी हो सकता है।
भुजंगासन या कोबरा पोज का अभ्यास
भुजंगासन योग गर्दन, रीढ़ और कंधे की जकड़न को दूर करने के प्रभावी योगासनों में से एक है। रीढ़ की हड्डी के सख्त हो जाने के कारण तंत्रिका आवेग बाधित हो जाता है। इससे सर्वाइकल सहित शरीर में अन्य अंगों की समस्याएं शुरू होने लगती हैं। कोबरा पोज़, सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस दर्द को कम करने में काफी कारगर योगाभ्यास है। इसकी आदत बनाकर आपको कुछ ही दिनों में लाभ मिल सकता है।
मकरासन योग से मिलेगा लाभ
मकरासन योग से शरीर के अंगों को काफी आराम मिलता है। रीढ़ को अपनी सामान्य स्थिति में लाने और गर्दन-कंधों में दर्द की समस्या को कम करने के लिए मकरासन योग करने की विशेषज्ञ सलाह देते हैं। यह योगासन कंधे और गर्दन की मांसपेशियों की अकड़न को कम कर देता है साथ ही इसे रक्त के संचार को बढ़ाने वाले योगासनों में से भी एक माना जाता है। नियमित रूप से मकरासन योग के अभ्यास की आदत बनाइए।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी विशेषज्ञ से संपर्क कर सकते हैं।
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