तनाव, हर वक्त थकान और अनिद्रा अस्वस्थ होने के कई ऐसे कारण हैं जो आपको स्वस्थ्य जीवन जीने से रोकते हैं। जिसका सीधा असर आपके दिल पर पड़ता है और हृदय रोग की संभावनाएं दोगुनी हो जाती हैं। ये मामले सिर्फ बुजुर्गों में ही नहीं बल्कि हर वर्ग के लोगों में भी पाए गए हैं। आपकी जीवनशैली में अच्छे बदलाव बेहद आवश्यक हैं। तो आज से योग को अपने दिनचर्या में करिए शामिल और दिल को स्वस्थ्य रखने के लिए इन दो योगासन का जरूर अभ्यास करें।
टिचक्रासन
यह आसन रक्त प्रवाह को सुचारु बनाता है, कोलेस्ट्रॉल के स्तर में कमी करके हार्ट अटैक से सुरक्षित रखता है। कमर और उसके आसपास के हिस्सों में जमी चर्बी घटाने में भी टिचक्रासन असरदार है। इसके अभ्यास से डायबिटीज भी नियंत्रित रहता है। अभ्यास करने के लिए फर्श पर सीधे खड़े हो जाएं और पैरों को कंधे की चौड़ाई जितनी दूरी पर रखें। हाथों को धीरे-धीरे सामने ले आएं, हथेलियों को एक-दूसरे के सामने रखें। अब सांस छोड़ते हुए बाईं ओर इस तरह मुड़ें कि दाएं हाथ की हथेली बाएं कंधे को छू जाए।
कुछ देर इसी मुद्रा में रुकें, इसके बाद सांस अंदर लेते हुए धीरे-धीरे सामने की ओर आ जाएं। अब सांस छोड़ते हुए दाईं ओर इस तरह मुड़ें कि बाएं हाथ की हथेली दाएं कंधे को छू जाए। कुछ देर इसी मुद्रा में रुकने के बाद सांस अंदर लेते हुए सामने की ओर आएं, हाथ नीचे ले जाएं। अगर आपके पेट का ऑपरेशन हुआ है या आपको स्लिप डिस्क की शिकायत है तो इस आसन का अभ्यास न करें।
वज्रासन
यह आसन हृदयगति को नियंत्रित रखता है और स्ट्रेस हार्मोन ‘कॉर्टिसोल’ को घटाकर तनाव कम करता है। इसके अभ्यास से जांघों और पिंडलियों की नसें-मांसपेशियां मजबूत बनती हैं। पाचन तंत्र दुरुस्त रहता है, पीठ और पैर दर्द में आराम मिलता है। इसे करने के लिए फर्श पर दोनों पैर सामने की ओर फैलाकर सीधे बैठें। दोनों हाथों को कुल्हे के पास ले जाकर फर्श पर टिकाएं। इस दौरान शरीर का पूरा भार हाथों पर न आए। अब पहले दायां, फिर बायां पैर मोड़कर कूल्हे के नीचे रखें। सुनिश्चित करें कि दोनों जांघें और पैर के अंगुठे आपस में सटे हों ।
अब दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। इसके बाद रीढ़ की हड्डी सीधी रखते हुए शरीर को ढीला छोड़ दें। आंखें बंदकर सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें, 5-10 मिनट तक इस अवस्था में रहें। इसके बाद शरीर को दाईं ओर झुकाते हुए बाएं पैर को और बाईं ओर झुकाते हुए दाएं पैर को आगे करें। घुटनों में दर्द या टखने में चोट लगी हो तो वज्रासन न करें।