शरीर को स्वस्थ और रोगमुक्त बनाए रखने के लिए समय-समय पर इसकी साफ-सफाई बेहद आवश्यक होती है। शरीर की साफ-सफाई का मतलब सिर्फ बाहरी स्वच्छता से नहीं है, इसके लिए इसे अंदर से भी स्वच्छ और शुद्ध बनाने की आवश्यकता होती है। मेडिकल साइंस में इस क्रिया को डिटॉक्सिफिकेशन कहा जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक शरीर मल-मूत्र और पसीने के माध्यम से अपनी आंतरिक सफाई स्वयं करता रहता है, हालांकि फिर भी कुछ अपशिष्ट शेष रह जाते हैं। समय के साथ-साथ शरीर में यह अपशिष्ट बढ़ते रहते हैं जो कई तरह की बीमारियों का कारण बन सकते हैं। शरीर के डिटॉक्सिफिकेशन की वैसे तो कई विधियां हैं पर इस लेख में हम योग के माध्यम से आपको उस विधि के बारे में बताने जा रहे हैं, जिससे घर पर रहकर भी आप आसानी से अपने शरीर को एकदम शुद्ध बनाए रख सकते हैं।
काम की बात: शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन हुआ बेहद आसान, इस योग से घर बैठे पा सकते हैं लाभ
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क्यों आवश्यक है शरीर का डिटॉक्सिफिकेशन?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डिटॉक्सिफिकेशन मुद्रा, शरीर के ऊर्जा चैनलों के साथ-साथ दिमाग से नकारात्मक ऊर्जा को खत्म करने मे सहायक है। सभी लोगों को दिन में कम से कम एक बार इस योग के माध्यम से शरीर की अशुद्धियों को दूर करने का प्रयास जरूर करना चाहिए। यह मुद्रा शरीर को अशुद्धियों को दूर करने के साथ और मन को बुरी ऊर्जा से मुक्त करने में बेहद सहायक हो सकती है। यह मुद्रा आपको उन विचारों, भावनाओं को दूर करने की मदद करती है जो शरीर को अंदर ही अंदर नुकसान पहुंचा रहे होते हैं।
कैसे करें अपान मुद्रा योग?
इस योग को करने के लिए सबसे पहले शांतिपूर्ण स्थान पर बैठ जाएं। आसपास शोरगुल या नकारात्मक चीजें नहीं होनी चाहिए। यह योग आप लेटकर, बैठकर या खड़े होकर कैसे भी कर सकते हैं। इस आसन को करने के लिए सबसे पहले दोनों हाथों की तर्जनी से मध्यमा और अनामिका को छोटी उंगली से मिलाएं। अपने अंगूठे को अनामिका के निचले जोड़ के बीच में ऐसे रखें जिससे दो-दो उंगलियों के जोड़ अलग-अलग हो जाएं। ऐसा करके आंखों को बंद कर लें और धीमी-गहरी सांस लेनकर ध्यान लगएं। इस अभ्यास को ज्यादा से ज्यादा वक्त तक करने की कोशिश करें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह मुद्रा शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करने के साथ अपशिष्टों के हटाने में बेहद सहायक है। चूंकि डिटॉक्सिफिकेशन शरीर और दिमाग दोनों का हो रहा होता है, इसलिए इस मुद्रा के साथ शरीर को पर्याप्त आराम देने के साथ शरीर के अंदर की अशुद्धियों को दूर करने के लिए खूब पानी पीना महत्वपूर्ण है। कई शोध में साबित हो चुका है कि इस मुद्रा का उपयोग कब्ज, सूजन, बवासीर, उल्टी, हिचकी और बेचैनी जैसी समस्याओं के इलाज के लिए किया जा सकता है। यह मासिक धर्म के दर्द और रक्तचाप को कम करने में भी मदद करता है। इसके अलावा लिवर और किडनी को स्वस्थ बनाए रखने में भी इसे काफी फायदेमंद माना जाता है।
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नोट: यह लेख योगगुरु के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।