दिल के साथ रखें सांसों की भी सेहत का ख्याल, रोज टहलते हुए करें ये प्राणायाम
भ्रमण प्राणायाम करने का तरीका
भ्रमण प्राणायाम मुख्य रूप से सांस लेने-छोड़ने से संबंधित होता है। इसे ब्रीदिंग तकनीक भी कह सकते हैं। इसे करना बहुत सरल है। इसे करने के लिए जब आप टहलते हैं, तब उस समय करें। टहलने के दौरान शरीर को सीधा रखते हुए सांस धीरे-धीरे लें। जब अच्छी तरह से गहरी सांस ले लें, तो उसके बाद सांस छोड़ दें। ध्यान रहे कि सांस लेने से ज्यादा समय आपको सांस छोड़ते समय लगाना है। सांस को 5 से 7 कदमों के बीच तक अंदर ही रोके कर रखें और फिर धीरे-धीरे सांस को छोड़ें। इस प्रक्रिया को कम से कम 10 बार जरूर दोहराएं।
इसका नियमित रूप से अभ्यास करने से फेफड़े मजबूत होते हैं। टीबी, अस्थमा रोग, टायफॉइड, इन्फ्लूएंजा रोगों से बचने के लिए आप भ्रमण प्राणायाम हर दिन कर सकते हैं। इसको करने से दिल स्वस्थ रहता है। जो लोग शारीरिक रूप से कमजोरी महसूस करते हैं उन्हें भी इसे जरूर करना चाहिए। इस योग का अभ्यास 35 वर्ष से ऊपर के व्यक्तियों के लिए बहुत लाभदायक है।
सावधानियां
भ्रमण प्राणायाम करते समय कुछ सावधानियां रखना जरूरी है। सांस तेजी से या जल्दबाजी में ना लें और ना ही छोड़ें। अपनी अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही इसका अभ्यास करें और सांस लेने की प्रक्रिया को बढ़ाएं। सीने में दर्द महसूस हो, तो इसे करना बंद कर दें। जब असहज महसूस होना ठीक हो जाए, तो दोबारा से इसका अभ्यास करना शुरू कर सकते हैं।
भ्रमण प्राणायाम करने की विधि अगर समझ नहीं आ रहीं तो किसी विशेषज्ञ की सलाह लें।