डेंगू खतरनाक बीमारी है, लेकिन इस बीमारी से डरने की नहीं, बल्कि बचने की जरूरत है। देखिए, कैसे फैलती है ये बीमारी, क्या कारण हैं और कैसे होगा बचाव?
बहुत से लोगों को नहीं पता कि डेंगू का मच्छर गंदी नालियों में नहीं बल्कि साफ सुथरे पानी में पनपते हैं। साफ सुथरे शहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को इसका ज्यादा खतरा रहता है। अगर आप को डेंगू हो जाए तो घबराएं नहीं, भरपूर मात्रा में तरल आहार लें, क्योंकि डिहाइड्रेशन से ही बीमारी खतरनाक होती है और अगर डेंगू के मरीज का प्लेटलेट्स काउंट 10,000 से ज्यादा हो तो प्लेटलेट्स ट्रांसफ्यूजन की जरूरत नहीं होती।
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बुखार के मरीज
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डेंगू में तेज बुखार के साथ नाक बहना, खांसी, आखों के पीछे दर्द, जोड़ों के दर्द और त्वचा पर हल्के रैश होते हैं। हालांकि कुछ लोगों में लाल और सफेद निशानों के साथ पेट खराब, जी मिचलाना, उल्टी आदि हो सकता है। चूंकि यह एक वायरस से होता है इसलिए इसकी कोई दवा या एंटीबायटिक नहीं है, इसका इलाज इसके लक्ष्णों का इलाज करके ही किया जाता है। तेज बुखार बीमारी के पहले से दूसरे हफ्ते तक रहता है।
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बुखार के मरीज
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डेंगू के ज्वर के लक्षण प्रथम चरण में सामान्य ज्वर के तरह ही लगते हैं। प्रथम चरण में डेंगू के लक्षण इस प्रकार के होते हैं- बुखार का टेम्परेचर चढ़ जाता है। बुखार आने के वक्त ठंड लगने लगता है। सर में बहुत दर्द होना। मांसपेशियों या जोड़ों में बहुत दर्द होना। ग्लैंड में दर्द या सूजन होना। उल्टी होना। भूख न लगना। ब्लडप्रेशर कम हो जाना। चक्कर आना। शरीर में रैशज का होना। खुजली होना। कमजोरी होना।
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यह तो डेंगू के प्रथम अवस्था के लक्षण हैं जो साधारणतः रोगी के शरीर के मुताबिक होता है। लेकिन जब डेंगू के रोग की स्थिति बहुत गंभीर हो जाती है तब शरीर में कुछ और समस्याएं नजर आने लगती है, जैसे- पेट में तेज दर्द होना। पेशीशूल। लीवर में फ्लूइड का जमा होना। सीने में फ्लूइड का जमा होना। खून में प्लेटलेट्स का कम होना। रक्तस्रावआदि।