रोजाना की व्यस्त जिंदगी में काम करते हुए आप थक जाते हैं। ज्यादा काम के कारण आपका खानपान भी अनियमित हो जाता है और आपके पास व्यायाम करने के लिए भी समय नही रहता है। यही आदत आपको धीरे-धीरे बीमार बना देती है। अगर आपके पास समय कम है, तो कुछ योग और प्रणायाम के आसन आपके लिए अच्छे विकल्प हो सकते हैं। कपालभाति प्राणायाम भी इन्हीं आसनों में से एक है। यह एक ऐसा आसन है जिसमे सभी योगासनों का फायदा मिलता है। आइए जानतें हैं इस प्राणायाम के बारे में...
कपालभाति के हैं जबरदस्त फायदे, अस्थमा से लेकर साइनस दूर करने में मददगार
कैसे करें यह आसन
कपालभाति प्राणायाम करने के लिए सिद्धासन, पद्मासन या वज्रासन में बैठ जाएं और अपनी हथेलियों को घुटनों पर रखें। अपनी हथेलियों की सहायता से घुटनों को पकड़कर शरीर को एकदम सीधा रखें। अब अपनी पूरी क्षमता का प्रयोग करते हुए सामान्य से कुछ अधिक गहरी सांस लेते हुए अपनी छाती को फुलाएं। इसके बाद झटके से सांस को छोड़ते हुए पेट को अंदर की ओर खिंचे। जैसे ही आप अपने पेट की मांसपेशियों को ढीला छोड़ते हैं, सांस अपने आप ही फेफड़ों में पहुंच जाती है। कपालभाति प्राणायाम को करते हुए इस बात का ध्यान रखें की आपके द्वारा ली गई हवा एक ही झटके में बाहर आ जाए। इस प्राणायाम को करते समय आपको यह सोचना है कि आपके सारे नकारात्मक तत्व शरीर से बाहर जा रहे हैं।
कपालभाति प्राणायाम के फायदे
कपालभाति प्राणायाम शरीर से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने में मदद करता है।
इस प्राणायाम के करने से खिलाड़ियों के अंदर खेल-कौशल में वृद्धि होती है।
अस्थमा रोगियों को इस प्राणायाम के करने से बहुत ही राहत मिलती है।
ये आंखों के नीचे के काले घेरों को भी ठीक करता है।
कपालभाति प्राणायाम करने से मेटाबॉलिज्म बढ़ता है और वजन कम होने लगता है।
और भी हैं फायदे
कपालभाति प्राणायाम करने से आंखों के नीचे के काले घेरे ठीक हो जाते हैं।
दांतों और बालों संबंधी सभी रोग इस प्राणायाम को करने से दूर हो जाते हैं।
इस प्राणायाम के करने से कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी पेट से संबंधित समस्या भी दूर हो जाती है।
कपालभाति प्राणायाम से श्वसनमार्ग की सफाई हो जाती है, जिससे श्वसन संबंधी रोग दूर होते हैं।
यह प्राणायाम साइनस को शुद्ध करता है तथा मस्तिष्क को सक्रिय करने में मदद करता है।
सावधानियां प्राणायाम करने में
कपालभाति प्राणायाम करते समय आपको कुछ सावधानियां भी बरतनी होगी। इस प्राणायाम का संबंध शरीर से नही दिमाग से होता है। अगर आप गलत तरीकों से इस प्राणायाम को करेंगे तो न्यूरोलॉजिकल समस्या एवं ह्रदय संबंधी रोग हो सकते हैं।