शारीरिक-मानसिक दोनों ही तरह के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए रोजाना योगासनों का अभ्यास करना सबसे अच्छा विकल्प माना जाता है। शरीर में रक्त के संचार को बढ़ावा देने के साथ दर्द, बीमारियों के विकास को रोकने और ऊर्जा के संचार को बढ़ाने में तमाम तरह के योगासनों के अभ्यास के लाभ पाए गए हैं। शलभासन योग एक ऐसा ही योगाभ्यास है जो शरीर के लिए अद्भुत लाभ दे सकता है। पेट-पीठ की समस्याओं को ठीक करने से लेकर मांसपेशियों की मजबूती और कई तरह की अन्य बीमारियों के जोखिम को कम करने में इस योग के अभ्यास को कारगर माना जाता है।
आज का योग: शलभासन का नियमित अभ्यास इस समस्याओं में है काफी फायदेमंद, क्या आप जानते हैं?
शलभासन योग कैसे करें?
शलभासन योग का अभ्यास आसान है, लेकिन किसी विशेषज्ञ से इसके सही तरीके के बारे में समझ लेना आवश्यक होता है। किसी भी योग से अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए उसका सही तरीके से अभ्यास किया जाना आवश्यक है। शलभासन करने लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। दोनों हाथों को सीधा करें और उनको जांघों के नीचे दबा लें। गहरी सांस लेते हुए सिर और दोनों पैरों को ऊपर की ओर उठाने की कोशिश करें। जितना हो सकता हैं उतना अपनी अधिकतम ऊंचाई तक पैरों को ऊपर करें। कुछ देर तक इस स्थिति में रहें और फिर अपनी प्रारंभिक स्थिति में आ जाएं।
शलभासन योग के क्या लाभ हैं?
योग विशेषज्ञों के मुताबिक शलभासन योग करने से सेहत को कई तरह से लाभ हो सकता है।
- पीठ के निचले हिस्से, पैल्विक अंगों, पैरों, कूल्हे के जोड़ों और बाहों को मजबूत करता है।
- साइटिक नसों को टोन करता है।
- कमर दर्द, हल्के साइटिका और स्लिप डिस्क में आराम मिलता है।
- पेट और आंत के रोगों में लाभदायक माना जाता है।
- रीढ़ और पूरे ऊपरी शरीर में रक्त परिसंचरण को बढ़ाता है।
- किडनी, लिवर और शरीर के निचले हिस्से के सभी अंगों को अनुकूल रूप से सक्रिय करता है।
- पेट के दबाव को बढ़ाने, आंतों के कार्य को नियंत्रित करने और पेट को मजबूत बनाने में सहायक है।
- भूख को बढ़ाता है।
- मासिक धर्म के दौरान पीठ दर्द को कम करने में सहायक माना जाता है।
इन बातों का रखें ध्यान
यदि आपकी हाल-फिलाहल कोई सर्जरी हुई हो तो इस आसन का अभ्यास न करें। यदि आपको हार्निया या पेट से संबंधित अन्य कोई समस्या है तो इस योग को करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर ले लें।
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नोट: यह लेख योग विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। आसन की सही स्थिति के बारे में जानने के लिए किसी योगगुरु से संपर्क कर सकते हैं।
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