आज के दौर में डेस्क जॉब, हर काम के लिए आरामदायक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करना आम बात है। ऐसे में, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द भी आम बात ही है क्योंकि शारीरिक गतिविधियों के बिना शरीर लचीला और फुर्तीला नहीं हो सकता। हालांकि, जोड़ों में दर्द की और वजह भी हो सकती है। वो अलग बात है कि दवाओं के उपयोग से इस दर्द से कुछ समय के लिए लाभ मिलता है लेकिन इसका उपचार योग में उपलब्ध है जिसके अभ्यास से दर्द से मुक्ति में जल्द लाभ मिलता है।
जोड़ों के दर्द से राहत दिलाएंगे ये 3 योगासन, नियमित करें अभ्यास
वीर भद्रासन
इस आसन की मुद्रा पहाड़ों पर जाने वाली मुद्रा के सामान होती है। अपने एक पैर को पीछे की ओर खींचकर, दूसरे पैर को आगे कूदने की मुद्रा में बना लें, जिसमें घुटने 90 डिग्री मुद्रा में हो और हाथों को जोड़कर सिर के ऊपर तक ले जाएं। यह आसन घुटनों को मजबूत बनाता है तथा जकड़े हुए कंधों को सक्रिय करने में मदद मिलती है। यह कंधों से दर्द मिटा कर शरीर को संतुलन प्रदान करता है।
धनुरासन
धनुरासन के अभ्यास के लिए सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं। अब अपने घुटनों को मोड़कर कमर के पास ले जाएं और अपने तलवों को दोनों हाथों से पकड़ें। अब सांस लेते हुए अपनी छाती को जमीन से ऊपर उठाएं। अब अपने पैरों को आगे की ओर खीचें। अब अपना संतुलन बनाते हुए सामने देखें। इस आसन को करने के लिए थोड़े अभ्यास की जरूरत है इसलिए धीरे-धीरे इसका अभ्यास करें। 15-20 सेकेंड बाद सांस छोड़ते हुए अपने पैर और छाती को धीरे-धीरे जमीन की ओर लाएं। यह पीठ को लचीला बनाता है और शरीर से तनाव को दूर करता है।
सेतुबंधासन
सेतुबंधासन के अभ्यास के लिए पीठ के बल लेट जाएं और अपने हाथों को शरीर के बगल में रखें। अब हथेली को जमीन से सटाकर रखें और घुटने मोड़ें ताकि पैर के तलवे जमीन से लग जाएं। अब आप सेतुबंधासन की प्रारंभिक स्थिति में हैं। अब धीरे-धीरे सांस लेते हुए अपने कमर को जितना हो सके ऊपर उठाएं, जिससे आपका शरीर एक सेतु यानी पुल का आकार में आ जाए। अब इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लें और छोड़ें। 10 से 30 सेकेंड तक इसी मुद्रा में बने रहें। अब सांस छोड़ते हुए अपने कमर को वापस जमीन पर लाएं और आराम के लिए पुन: शवासन के मुद्रा में आ जाएं।
त्रिकोणासन
त्रिकोणासन के अभ्यास के लिए सबसे पहले अपने पैरों को चौड़ा करके सीधे खड़े हो जाएं। इसके बाद अपनी रीढ़ की हड्डी को मोड़ लें और अपने हाथ को नीचे रख लें। इसके बाद अपना दाहिना हाथ ऊपर कर लें। अब अपने दाहिने हाथ की उंगली को देखें। कुछ देर बाद आप साधरण स्थिति में आ जाएं। अब फिर से निचे झुकते हुए बाएं हाथ के साथ इस आसन को दोहराएं।