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Eat The Frog: अगर दफ्तर और घर के काम के बीच संतुलन बनाना हो रहा है मुश्किल तो अपनाएं ये तरीका

Fri, 23 May 2025 04:31 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवानी अवस्थी Updated Fri, 23 May 2025 04:31 PM IST
सार

What Is Eat The Frog Technique: आजकल कामकाजी और निजी जीवन में संतुलन बिठाने के लिए ‘ईट द फ्रॉग’ तकनीक काफी लोकप्रिय हो रही है।

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क्या है ईद द फ्राॅग तकनीक - फोटो : Adobe

मोनिका अग्रवाल


:
नेहा को आज फिर से ऑफिस जाने में देरी हो गई। उसने घड़ी की ओर देखा और बड़बड़ाने लगी, “जिंदगी में जैसे सुकून खत्म हो गया है। घर का काम अधूरा छोड़ दो तो परिवार वाले गुस्सा होते हैं और दफ्तर दो मिनट लेट पहुंचो तो बॉस गुस्सा करने लगते हैं। सब मैनेज करना मुश्किल हो रहा है। मन करता है, नौकरी छोड़कर घर बैठ जाऊं।

नेहा की बड़बड़ाहट जैसे ही उसकी जेठानी के कानों में पड़ी, वह मुस्कुराते हुए बोली, “नेहा, वर्किंग वुमन हो या हाउसवाइफ, इस स्थिति से सभी को दो-चार होना पड़ता है। आज के समय में हर कोई खुद को काम के बोझ तले दबा महसूस करता है। तुम भी इससे अछूती नहीं हो। वर्किंग वूमन के सामने तो दोहरी जिम्मेदारियों का पहाड़ होता ही है। तुम को थोड़ी समझदारी के साथ अपनी वर्क और पर्सनल लाइफ को मैनेज करना होगा, जिसके लिए तुम ‘ईट द फ्रॉग’ तकनीक को अपना सकती हो।”

जेठानी की बात सुनकर नेहा हैरानी से उनकी ओर देखने लगी और बोली, “यह क्या है, दीदी?

इस पर जेठानी ने कहा, “आजकल काम के ढेर के बीच महिलाएं यह निर्णय नहीं कर पातीं कि उन्हें कौन-से काम पहले करने हैं और कौन-से बाद में। ऐसे में कोई काम ठीक से नहीं हो पाता। यह कंफ्यूजन जिंदगी को और उलझा देता है तो कई बार विफलता का कारण भी बन जाता है।

कहीं आप भी तो नेहा की तरह ही खुद को इन उलझनों में फंसा हुआ नहीं पातीं? अगर हां तो आप ‘ईट द फ्रॉग’ तकनीक को अपना सकती हैं।

क्या है यह तकनीक

आप इस तकनीक के नाम पर न जाएं, असल में यह आपकी कार्य-कुशलता को बढ़ाने की एक तकनीक है। यह विधि मनोवैज्ञानिक रूप से काम करती है और आपके मानसिक प्रतिरोध को कम करती है। इस विधि को माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के सह-संस्थापक और अध्यक्ष बिल गेट्स की देन माना जाता है, जिसे लोगों तक पहुंचाने में प्रोडक्टिविटी कंसल्टेंट ब्रायन ट्रेसी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह आपके लिए घर और ऑफिस, दोनों जगह काम आती है।

यह तकनीक आपको आजादी देती है कि आप कैसे कम समय में अपने काम को पूरा कर सकती हैं। यह विधि आपको बताती है कि अगर आपके पास कई फ्रॉग (मेंढक) यानी काम हैं तो आप सभी को पकड़ने की दौड़ में शामिल न हों, बल्कि सबसे पहले बड़े फ्रॉग यानी काम को पकड़ें और उसे पूरा करें। हालांकि आमतौर पर लोगों के पास दो से कहीं ज्यादा टास्क होते हैं। ऐसे में आप असंख्य कामों के पीछे न भागें, बल्कि पहले वो काम चुनें, जिसके लिए आपको ज्यादा फोकस और एनर्जी की जरूरत है। इसके बाद अन्य कामों को पूरा करें। ऐसा करने से आप सकारात्मक होकर अपने सारे टारगेट पूरे कर पाएंगी। इसलिए आप दिन के सबसे जरूरी काम को पहले पूरा करने का लक्ष्य बनाएं और उसे समय लेकर पूरा करें। ऐसा करके आप अपने समय का सही इस्तेमाल कर सभी काम अच्छी तरह पूरे कर पाएंगी।

काम पर फोकस

ईट द फ्रॉग’ टेक्निक कुछ महिलाओं के लिए बहुत काम की है, खासतौर पर ऐसी महिलाओं के लिए, जिन्हें काम को टालने की आदत होती है और वे कोई भी काम समय पर पूरा नहीं कर पाती हैं। कई बार महिलाएं सारे काम निपटाने के चक्कर में काम तो ढेर सारे कर लेती हैं, लेकिन सबसे जरूरी काम करना भूल जाती हैं। वहीं कई महिलाएं समय और काम के बीच तालमेल नहीं बिठा पातीं और अपने टारगेट को पूरा करने के लिए सही रणनीति नहीं बना पाती हैं, जिस कारण उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ता है। ऐसी महिलाओं के लिए ‘ईट द फ्रॉग’ टेक्निक बहुत काम आती है। इसलिए आप सबसे पहले एक टू डू लिस्ट यानी काम की सूची बनाएं, ताकि आप अपने काम पर फोकस कर पाएं।

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दफ्तर और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाने का तरीका - फोटो : Pexel

पूरी क्षमता के साथ

आप में से बहुत-सी महिलाओं को लगेगा कि यह बात तो आप पहले से जानती हैं, जो काफी हद तक सही भी है, लेकिन ज्यादातर महिलाएं जानते हुए भी इसे नहीं अपनाती हैं। वहीं ‘ईट द फ्रॉग’ टेक्निक आपको बहुत-सी अन्य बातें भी सिखाती है। काम करने का यह शानदार कॉन्सेप्ट आपको सिखाता है कि कैसे आप तय किए गए कामों को समय पर पूरी क्षमता के साथ कर सकती हैं। दरअसल, जब आप अपना सबसे मुश्किल, महत्वपूर्ण और ऊर्जा लगने वाले काम पहले करती हैं तो उसे आप अच्छी तरह कर पाती हैं। इससे आपका आत्मविश्वास बढ़ता है और आपको बाकी सारे काम भी जल्दी खत्म करने का समय मिल जाता है, जो आपके काम करने के कौशल को सुधारता है और प्रोडक्टिविटी को भी बढ़ाता है।

एजेंडे का निर्धारण

अक्सर जब आप काम करने बैठती हैं तो सबसे पहले अपने ईमेल और आने वाले संदेशों की जांच करती हैं। ई-मेल और इंस्टेंट मैसेजिंग टूल आपको रिएक्टिव मोड में डाल देते हैं, जैसे ही आप जवाब देना शुरू करती हैं अपना समय और ध्यान दूसरे लोगों की इच्छाओं या जरूरतों पर लगा देती हैं। इस तरह की प्रतिक्रियात्मक प्राथमिकता आपके कार्य पर हावी हो सकती है। वहीं घर में भी कभी फोन तो कभी टीवी और सोशल मीडिया में ध्यान लगा रहता है।

‘ईट द फ्रॉग’ कहती है कि जब तक काम पूरा न हो जाए, ऐसी किसी भी बात पर ध्यान न दें, जो आपके लक्ष्य को प्रभावित करे। यह तकनीक आपके समय प्रबंधन प्रयासों में मदद करती है और आपको अपने एजेंडे को पहले रखने और उसे ईमानदारी के साथ पूरा करने को कहती है, इससे पहले कि आप अपना समय खराब करें।

परफेक्शन बहुत जरूरी

जब भी आप काम शुरू करती हैं तो शुरुआती घंटों में आपमें उत्साह और ऊर्जा ज्यादा होती है। वहीं दोपहर के भोजन के बाद इसमें कुछ कमी आ जाती है। अक्सर महिलाएं सोचती हैं कि पहले छोटे काम पूरे कर लें और बाद में बड़े काम करेंगे, लेकिन असल में दिन के अंतिम समय में वे अपनी शारीरिक और मानसिक शक्ति पहले ही समाप्त कर चुकी होती हैं। ‘ईट द फ्रॉग’ तकनीक उन्हें बताती है कि आप पहले मुश्किल काम करें, जिससे आपकी ऊर्जा बर्बाद न हो और काम भी जल्दी पूरा हो सके।


सही काम का चुनाव

लाइफ कोच निधि गुप्ता बताती हैं, ‘ईट द फ्रॉग’ टेक्निक अपनाने से पहले सही फ्रॉग यानी काम को चुनना सबसे जरूरी है। इसलिए सबसे पहले आप कामों की एक सूची बनाएं और सबसे जरूरी तथा जटिल कार्य को पहले नंबर पर रखें। कोशिश करें कि एक रात पहले ही आप इस सूची को तैयार कर लें, जिससे अगले दिन के लिए आप मानसिक रूप से तैयार रहें। इसके बाद जरूरी है उस काम के लिए समय तय करना। आप एक से चार घंटे का टारगेट रखें। अगर काम बहुत मुश्किल है, तब भी इसे आधे दिन से पहले पूरा करने की कोशिश करें। काम को अच्छी तरह से करने के लिए हमेशा उसे छोटे-छोटे स्टेप्स में बांट लें। अगर आप काम पर फोकस नहीं कर पा रही हैं तो बीच-बीच में एक छोटा ब्रेक लें, खुद को समय दें और फिर से जुट जाएं अपने उद्देश्य को पूरा करने में।

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