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UNICEF India: क्या है बाल शोषण? जानें बच्चों पर इसका असर और बाल सुरक्षा कानून के बारे में

Sat, 18 Feb 2023 06:43 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवानी अवस्थी Updated Sat, 18 Feb 2023 06:43 PM IST
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UNICEF India Child Abuse India Taking Measures to Address Child Abuse and Improve Child Safety
बाल शोषण और सुरक्षा - फोटो : unicef india

Child Abuse : बच्चों के खिलाफ हिंसा, दुर्व्यवहार और शोषण उनके जीवन व स्वास्थ्य को बुरी तरह प्रभावित करता है, जो कि बच्चे के भावात्मक कल्याण और भविष्य के लिए खतरा है। भारत में बाल शोषण के अत्यधिक मामले हैं। लाखों बच्चे हिंसा और उत्पीड़न का शिकार हैं। वहीं यूनिसेफ की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के आधे से अधिक बच्चों ने गंभीर हिंसा को सहन किया है। इनमें से 64 फीसदी बच्चे दक्षिण एशिया के हैं। हालांकि हर बच्चे को हिंसा, शोषण और दुर्व्यवहार से सुरक्षित रहने का अधिकार है। भारत में बच्चों की सुरक्षा के लिए अनेक कानून भी हैं। हालांकि मानव संसाधनों की कमी और अन्य कारणों से बाल सुरक्षा कानून लागू नहीं हो पाता। कई मामलों में तो बाल हिंसा की शिकायत दर्ज नहीं होती और दोषियों को सजा भी नहीं मिल पाती। ऐसे में बाल हिंसा की रोकथाम के लिए सरकार, यूनिसेफ और कई सरकारी व गैर सरकारी संगठन कई कार्यक्रम चला रहे हैं। आइए जानते हैं बाल शोषण क्या है, इसका बच्चों पर असर और रोकथाम के तरीके।

UNICEF India Child Abuse India Taking Measures to Address Child Abuse and Improve Child Safety
बाल शोषण - फोटो : unicef india

क्या है बाल शोषण

दुनियाभर में सभी सामाजिक, आर्थिक पृष्ठभूमि के सभी उम्र, धर्मों और संस्कृतियों के लाखों बच्चे हर दिन हिंसा और दुर्व्यवहार के शिकार होते हैं। यह हिंसा, शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक हो सकती है। बाल शोषण के कई मामलों को उपेक्षा के रूप में भी ले सकते हैं। बाल हिंसा अंतर्वैयक्तिक हो सकती है या ऐसी गतिविधियां जो हिंसक व्यवहार को बढ़ावा देने या अनुमति देने वाली भी होती है।

UNICEF India Child Abuse India Taking Measures to Address Child Abuse and Improve Child Safety
बाल सुरक्षा - फोटो : unicef india

बच्चों के साथ होने वाली हिंसा के प्रकार

हिंसा कहीं भी और किसी भी तरह से हो सकती है। घर, स्कूल, बाल देखभाल केंद्र, कार्यस्थल और समुदाय में अक्सर परिचित लोग ही बच्चों संग हिंसा करते हैँ। भारत में लड़कियों और लड़कों दोनों की जल्द शादी, घरेलू शोषण, बाल यौन शोषण, तस्करी, ऑनलाइन हिंसा, बाल मजदूरी और डराने धमकाने का सामना करना पड़ता है।

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यूनिसेफ बाल सुरक्षा - फोटो : unicef india

बाल हिंसा का असर

बाल शोषण के सभी प्रकारों का बच्चों के जीवन पर दीर्घावधि प्रभाव पड़ता है। बच्चे मानसिक, शारीरिक और सामाजिक तौर पर कमजोर पड़ते हैं। कई मामलों में तो परिजन बच्चों के साथ होने वाली हिंसा की रिपोर्ट देने में हिचकिचाते हैं। ऐसे में हिंसा का सामना करने वाले बच्चों का सही आंकड़ा पता नहीं चल पाता। साथ ही इन अपराधों की जाँच कम हो पाती है।

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बाल सुरक्षा - फोटो : unicef india

बाल सुरक्षा कानून

भारत में बाल सुरक्षा के लिए कानून है। बच्चों की सुरक्षा को सामाजिक विकास के मुख्य घटक के रूप में तेजी से स्वीकार किया जा रहा है। हालांकि जमीनी स्तर पर मानव संसाधन क्षमता की कमी है। साथ ही गुणवत्ता निवारण और पुनर्वास सेवाओं की कमी के कारण बाल सुरक्षा कानूनों को लागू करना चुनौतीपूर्ण है। इस कारण लाखों बच्चे हिंसा, दुर्व्यवहार और शोषण का शिकार होते हैं।

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