विदेश घूमने की उत्सुकता हर व्यक्ति के मन में होती है, साथ समुंदर पार दूसरे देश की संस्कृति और सभ्यता देखने में कोई बुराई नहीं है लेकिन इससे पहले अपने देश की उन विदेश जैसी दिखने वाली जगहों को तो देख लें जहां जाने का सपना बचपन से देख रहे हैं। यकीन मानिए इतना पैसा खर्च करके विदेश जाना का आईडिया दिमाग से निकल जाएगा। पंजाब के कपूरथला की तुलना अक्सर पेरिस से की जाती है, क्योंकि यहां पर उत्कृष्ट वास्तुशिल्प के अनेक उदाहरण मौजूद हैं। पंजाब के पेरिस के रूप में प्रसिद्ध इस शहर की वास्तुकला में इंडो-फ्रांसीसी शैली की झलक मिलती है। ये शहर अपनी शानदार प्राचीन इमारतों के साथ इतिहास और संस्कृति के लिए मशहूर है। जब भी कपूरथला घूमने का प्लान बनाएं तो इन जगहों पर जरूर घूमें।
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देखना चाहते हिंदुस्तान का पेरिस तो रुख करें पंजाब के 'कपूरथला' की ओर
Tue, 03 Sep 2019 01:41 PM IST
पंखुड़ी सिंह
लाइफस्टाइल डेस्क
लाइफस्टाइल डेस्क
Published by: पंखुड़ी सिंह
Updated Tue, 03 Sep 2019 01:41 PM IST
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कपूरथला का एलिसी महल
कपूरथला में वास्तुकला के लिए मशहूर उत्कृष्ट इमारतों की कोई कमी नहीं है। इन्हींं में से एक है एलिसी पैलेस। सन् 1962 में कंवर बिक्रम सिंह द्वारा निर्मित इस महल की इंडो-फ्रेंच वास्तुकला अपने समय की वास्तुकला और समृद्धि का बखान करती है। इस महल को अब एक मोंटगोमरी गुरु नानक स्कूल में बदल दिया गया है।
कपूरथला में वास्तुकला के लिए मशहूर उत्कृष्ट इमारतों की कोई कमी नहीं है। इन्हींं में से एक है एलिसी पैलेस। सन् 1962 में कंवर बिक्रम सिंह द्वारा निर्मित इस महल की इंडो-फ्रेंच वास्तुकला अपने समय की वास्तुकला और समृद्धि का बखान करती है। इस महल को अब एक मोंटगोमरी गुरु नानक स्कूल में बदल दिया गया है।
जगतजीत महल
कपूरथला के पूर्व महाराजा जगतजीत सिंह इस महल में रहा करते थे। जगतजीत पैलेस का अस्तित्व वर्ष 1908 से है। जगतजीत पैलेस में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एक सैनिक स्कूल भी है। ये कपूरथला के सबसे शानदार स्थलों में से एक माना जाता है।
कपूरथला के पूर्व महाराजा जगतजीत सिंह इस महल में रहा करते थे। जगतजीत पैलेस का अस्तित्व वर्ष 1908 से है। जगतजीत पैलेस में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करने के लिए एक सैनिक स्कूल भी है। ये कपूरथला के सबसे शानदार स्थलों में से एक माना जाता है।
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कांजली वेटलैंड
1870 में ब्यास नदी के पार आसपास के इलाकों में सिंचाई के लिए 56 वर्ग मीटर भूमि के क्षेत्र में कांजली वेटलैंड निर्मित किया गया है। मानव निर्मित वेटलैंड एक शानदार पिकनिक स्पॉट है जहां पर हर तरफ प्राकृतिक सौंदर्य की छटाएं बिखरी हुई हैं। पर्यटकों के बीच यह जगह फोटोग्राफी के लिए बहुत मशहूर है।
1870 में ब्यास नदी के पार आसपास के इलाकों में सिंचाई के लिए 56 वर्ग मीटर भूमि के क्षेत्र में कांजली वेटलैंड निर्मित किया गया है। मानव निर्मित वेटलैंड एक शानदार पिकनिक स्पॉट है जहां पर हर तरफ प्राकृतिक सौंदर्य की छटाएं बिखरी हुई हैं। पर्यटकों के बीच यह जगह फोटोग्राफी के लिए बहुत मशहूर है।
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kapurthala
- फोटो : kapurthala
शालीमार गार्डन
विशिष्ट वास्तुशिल्प प्रदर्शनों के लिए प्रसिद्ध शालीमार गार्डन हमेशा पर्यटकों से भरा रहता है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर इस जगह पर आकर आप मन बहुत शांति और सुकून का अहसास होता है। फूलों से सजे इस बगीचे में पर्यटक घंटो आराम से बैठकर समय बिता सकते हैं।
विशिष्ट वास्तुशिल्प प्रदर्शनों के लिए प्रसिद्ध शालीमार गार्डन हमेशा पर्यटकों से भरा रहता है। शहर की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर इस जगह पर आकर आप मन बहुत शांति और सुकून का अहसास होता है। फूलों से सजे इस बगीचे में पर्यटक घंटो आराम से बैठकर समय बिता सकते हैं।