सैर कर दुनिया की गाफिल जिंदगानी फिर कहां, जिंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहां। ख्वाजा मिर दर्द की ये लोकप्रिय शेर आपने जरूर सुनी होगी। लेकिन आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताने जा रहे हैं जहां जाने के लिए किसी खास उम्र की जरूरत नहीं होती। बच्चों से लेकर बुढ़े हर वर्ग के लोगों को यह शहर सूकून ही देता है। हम बात कर रहे हैं वाराणसी यानी बनारस की। इस शहर को महादेव की नगरी भी कहा जाता है। आइए जानते हैं इस शहर के लोकप्रिय जगहों के बारे में...
महादेव के सेवक कालभैरव करते हैं इस शहर की रखवाली, लाखों विदेशी भी हैं यहां की जगहों के दीवाने
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कालभैरव मंदिर
भगवान शिव की पावन नगरी बनारस 'मोक्ष' का शहर कहलाता है। महादेव की इस नगरी को बाबा कालभैरव सुरक्षा देते हैं। बनारस में काशी विश्वनााथ के नाम से भगवान शिव का एक बहुत ही मशहूर मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। मान्यताओं के अनुसार बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को कालभैरव के दर्शन करना जरुरी होता है। बाबा कालभैरव को काशी का कोतवाल कहा जाता है। बाबा कालभैरव का मंदिर विश्वनाथ मंदिर के पास में ही है।
गंगा स्नान
गंगा किनारे बसे वाराणसी को घाटों का शहर भी कहा जाता है। यहां यूं तो कुल 84 घाट हैं, लेकिन दशाश्वमेध घाट, अस्सी घाट और मणिकर्णिका घाट का ज्यादा महत्व है। श्रद्धालु यहां पवित्र नदी गंगा में डुबकी लगाकर मोक्ष की कामना करते हैं। गंगा घाटों पर मन को अलग ही शांति मिलती है। आपको ऐसा लगेगा जैसे आपकी चिंता दूर हो रही है। गंगा में बोट राइडिंग का भी अलग ही मजा है। काशी विश्वनाथ मंदिर के पास में ही दशाश्वमेध घाट है।
गंगा आरती
बनारस के कई घाटों पर गंगा आरती की जाती है। लेकिन दशाश्वमेध घाट पर हर दिन भव्य तरीके से गंगा आरती की जाती है। वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर होने वाली इस भव्य गंगा आरती की शुरुआत 1991 से हुई थी। यह आरती हरिद्वार में हो रही आरती का जीता जागता उदाहरण है। हरिद्वार की परंपरा को काशी ने पूरी तरह आत्मसात किया है। आरती के समय गंगा नदी में बहता जल पूरी तरह से रोशनी में सराबोर हो जाता है।
लोकल बाजार में शॉपिंग
विश्वनाथ मंदिर वाली गली के साथ-साथ अगर आप पास की गलियों में खरीदारी नहीं की तो बहुत कुछ मिस कर सकते हैं। इन बाजारों में ऐसा कुछ भी नहीं है जो न मिल जाए।