Famous Devi Temples in UP: उत्तर प्रदेश धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण राज्य है। यहां देवी माता के कई प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिर अलग-अलग जिलों में स्थित हैं, जहां सालभर श्रद्धालुओं की भीड़ देखने को मिलती है। नवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन होते हैं।
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Shardiya Navratri 2026: उत्तर प्रदेश में देवी उपासना से जुड़े अनेक प्रसिद्ध मंदिर और शक्तिपीठ हैं। उत्तर प्रदेश पर्यटन की सूची में विंध्यवासिनी देवी, पाटेश्वरी देवी, ललिता देवी, शाकुम्भरी देवी, कात्यायनी देवी, शीतला चौकिया धाम, विशालाक्षी देवी समेत कई प्रमुख देवी स्थलों का उल्लेख है।
यूपी के प्रमुख देवी मंदिर
ललिता देवी- नैमिषारण्य, सीतापुर
यूपी के सीतापुर में नैमिषाराण्य में श्री मां ललिता देवी मंदिर स्थित है जो कि 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का हृदय गिरा था। देवी ललिता को अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा जाता है।
मंदिर खुलने का समय सुबह 6 बजे से रात 8 बजे तक रहता है। मां ललिता देवी के दर्शन के लिए लखनऊ से नैमिषारण्य की दूर 100 किमी दूर है। लखनऊ के केसरबाग बस अड्डे से सीधी बसें मिलती हैं। सीतापुर और बालामऊ रेलवे स्टेशन नैमिषारण्य के करीब है।
विशालाक्षी देवी -वाराणसी
वाराणसी के मीरघाट क्षेत्र में स्थित मां विशालाक्षी देवी मंदिर प्रमुख शक्तिपीठों में गिना जाता है। काशी यात्रा के दौरान श्रद्धालु मां विशालाक्षी के दर्शन को विशेष महत्व देते हैं।
बेल्हा देवी, प्रतापगढ़
प्रतापगढ़ का बेल्हा देवी मंदिर सई नदी के तट से जुड़ा प्रमुख धार्मिक स्थल है। मां बेल्हा देवी के प्रति स्थानीय लोगों की गहरी आस्था है और नवरात्रि में यहां विशेष धार्मिक गतिविधियां होती हैं।
विंध्यवासिनी देवी- मिर्जापुर
उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में गंगा नदी के तट पर स्थित विंध्यावासिनी धाम प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। इस क्षेत्र में मां विंध्यवासिनी के साथ अष्टभुजा देवी और काली खोह के मंदिर शामिल हैं। मंदिर प्रतिदिन सुबह 5 बजे से रात 9.30 बजे तक खुला रहता है। सबसे करीबी रेलवे स्टेशन विंध्याचल स्टेशन है जो कि एक किमी दूर है। मिर्जापुर स्टेशन लगभग 9 किमी की दूरी पर है।
अलोपी देवी- प्रयागराज
प्रयागराज का अलोपी देवी मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक परंपरा के लिए प्रसिद्ध है। यहां देवी की पारंपरिक प्रतिमा के बजाय पालने की पूजा की जाती है, जिससे यह मंदिर अन्य शक्तिस्थलों से अलग नजर आता है।
ललिता देवी- प्रयागराज
प्रयागराज के प्रतिष्ठित देवी मंदिरों में ललिता देवी मंदिर का विशेष स्थान है। धार्मिक मान्यताओं के कारण नवरात्रि और अन्य पर्वों पर यहां श्रद्धालुओं की खास भीड़ देखने को मिलती है।
शीतला चौकिया धाम, जौनपुर
जौनपुर का शीतला चौकिया धाम मां शीतला को समर्पित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ आसपास के जिलों से भी लोग यहां दर्शन और पूजा के लिए पहुंचते हैं।
पाटेश्वरी देवी- देवीपाटन, बलरामपुर
बलरामपुर जिले के तुलसीपुर में देवी पाटन मंदिर स्थित है, जोकि 51 शक्तिपीठों में शामिल है। मान्यता है कि यहां मां सती का दाहिना स्कंध और वस्त्र गिरे थे। इस कारण इसे देवीपाटन नाम दिया गया। यहां विराजमान देवी को मां पाटेश्वरी कहा जाता है।
मंदिर आमतौर पर सुबह 4 बजे से दोपहर 3.30 बजे तक और शाम को 6.30 बजे से रात 10 बजे तक खुला रहता है। मंदिर पर पहुंचने के लिए तुलसीपुर रेलवे स्टेशन मंदिर से लगभग 2 किलोमीटर की दूरी पर है। बलरामपुर से लगभग 25 किमी दूर मंदिर है। गोंडा या बलरामपुर से बसें आसानी से मिल सकती है।
शिवानी देवी, चित्रकूट
चित्रकूट धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के लिए प्रसिद्ध है और यहां देवी शिवानी का भी महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल माना जाता है। चित्रकूट की तीर्थयात्रा के दौरान श्रद्धालु आसपास के देवी मंदिरों के दर्शन भी करते हैं।
ज्वाला देवी, सोनभद्र
सोनभद्र क्षेत्र में स्थित ज्वाला देवी मंदिर स्थानीय आस्था का प्रमुख केंद्र है। प्राकृतिक परिवेश और धार्मिक महत्व के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के साथ धार्मिक पर्यटन में रुचि रखने वाले यात्रियों को भी आकर्षित करता है।
तरकुलहा देवी, गोरखपुर
गोरखपुर का तरकुलहा देवी मंदिर पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध देवी स्थलों में शामिल है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय लोककथाएं और परंपराएं इसे धार्मिक यात्रा के लिहाज से खास बनाती हैं।
कुष्मांडा देवी, घाटमपुर, कानपुर देहात
घाटमपुर स्थित मां कुष्मांडा देवी मंदिर नवरात्रि के दौरान विशेष रूप से श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है। मां कुष्मांडा को देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों में चौथे स्वरूप के रूप में पूजा जाता है।
शीतला माता मंदिर, मैनपुरी
मैनपुरी का शीतला माता मंदिर स्थानीय स्तर पर आस्था का प्रमुख केंद्र है। मां शीतला की पूजा से जुड़ी परंपराओं के कारण विशेष पर्वों और धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है।
शाकुम्भरी देवी- सहारनपुर
सहारनपुर में शिवालिक पहाड़ियों के बीच मां शाकुंभरी देवी का मंदिर है। यह मंदिर सहारनपुर से लगभग 40 किमी उत्तर में बेहट तहसील के एक गांव में स्थित है। यहां मां दुर्गा के चार रूपों के दर्शन एक साथ मिलते हैं। मान्यता है कि अकाल के समय माता ने पृथ्वी पर शाक यानी फल -सब्जियां प्रदान किए थे। दिल्ली, सहारनपुर आदि से बस या निजी वाहन के जरिए आसानी से इस मंदिर तक पहुंचा जा सकता है।