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कहीं आपको भी नोमोफोबिया तो नहीं? ऐसे रोकें स्मार्टफोन की लत, रखें सोशल मीडिया उपवास

Sun, 12 Jan 2020 03:52 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला Published by: निलेश कुमार Updated Sun, 12 Jan 2020 03:52 PM IST
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mobile phone use increase mobile addiction Do you suffer from nomophobia Stop smartphone addiction
Mobile User

मोबाइल हमारे जीवन का ऐसा हिस्सा बन गया है कि हम इसके बिना कुछ देर भी नहीं रह पाते। रह-रह कर हमारा ध्यान अपने मोबाइल पर जाता है। कई बार तो हमारा मोबाइल रिंग भी नहीं करता और हमें लगने लगता है कि किसी का कॉल आया है और हम चौंक जाते हैं। खासकर युवाओं के लिए मोबाइल ऐसी जरूरत बन गया है, जिसके बिना जिंदगी अधूरी लगती है। मोबाइल खो गया तो लगता है बहुत कुछ चला गया। मोबाइल खोने का भी एक फोबिया होता है- नोमोफोबिया। यह मानसिक रोग युवाओं में तेजी से फैल रहा है। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से:

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Mobile user

हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया(एचसीएफआई) के अनुसार हमारे मोबाइल फोन और कंप्यूटर पर आने वाले नोटिफिकेशन, कंपन(वाइब्रेशन) जैसे अलर्ट हमें लगातार मोबाइल या कंप्यूटर स्क्रीन की ओर देखने के लिए मजबूर करते हैं। इसका ये मतलब हुआ कि हमारा दिमाग लगातार सक्रिय और सतर्क रहता है, लेकिन यह सतर्कता असामान्य है, जो कि खतरनाक है। 56 फीसदी लोगों का मानना है कि बिना मोबाइल के तो जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती। सीएमआर की रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है।

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एक अध्ययन के अनुसार, 20 से 30 साल की आयु के लगभग 60 फीसदी युवा मोबाइल खोने की आशंका से ग्रस्त हैं। नोमोफोबिया युवाओं में तेजी से बढ़ रहा है। वहीं, देश के 50 फीसदी उपभोक्ताओं को हर पल मोबाइल स्क्रीन स्विच करने की लत है। कुछ दिन पहले आई साइबर मीडिया रिसर्च की रिपोर्ट के अनुसार स्मार्टफोन ऐसी आखिरी ऐसी चीज है, जिसे 80 फीसदी भारतीय(मोबाइल यूजर) सोने से पहले देखते हैं।

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आपको यह जानकर और आश्चर्य हो सकता है कि 74 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जो जागते ही मोबाइल ढूंढने लगते हैं और आधे घंटे के अंदर अपना मोबाइल फोन चेक करते हैं। 30 फीसदी मामलों में अभिभावकों के साथ बच्चों के संघर्ष का कारण मोबाइल है। देर रात मोबाइल चलाने के कारण बच्चे सुबह देर से जागते हैं और समय से स्कूल नहीं जा पाते हैं।

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मोबाइल स्क्रीन पर नीचे देखने या लैपटॉप का उपयोग करते समय गर्दन को बाहर निकालने से रीढ़ पर बहुत दबाव पड़ता है। हम प्रतिदिन मोबाइल, कंप्यूटर और अन्य गैजेट्स पर काफी समय बिताते हैं। इस कारण हमें गर्दन, कंधे, पीठ, कोहनी, कलाई और अंगूठे के लंबे और पुराने दर्द सहित कई समस्याएं होती है। वहीं, दिमाग भी असामान्य रूप से सक्रिय रहता है।

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