विश्वभर में न जाने कितनी भाषाएं हैं, जो अलग- अलग क्षेत्रों में बोली जाती हैं लेकिन यह बात तो तय है कि इन सब भाषाओं की जननी कुछेक ही प्राचीन भाषाएं हैं। यह प्राचीन भाषाएं आज भी विश्व के कई देशों में बोली जाती हैं बल्कि नई पीढ़ी तो इन प्राचीन भाषाओं को फिर से सीखना चाहती हैं ताकि वे इन भाषाओं को समझ सकें। इन भाषाओं में रचे ग्रंथों का अध्ययन कर सकें। अगली स्लाइड्स से जानिए भारतीय प्राचीन भाषाओं से जुड़ी रोचक जानकारी।
जानिए विश्व की उन प्राचीन भाषाओं के बारे में जो आज भी बोली और समझी जाती हैं
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संस्कृत
संस्कृत का अर्थ है - संस्कार की हुई या परिमार्जित भाषा। यह शास्त्रीय भाषा क़रीब 5 हज़ार वर्ष पुरानी है। सभी आधुनिक भारतीय भाषाएं जैसे हिंदी, मराठी, पंजाबी, उड़िया, नेपाली, कश्मीरी आदि इसी से उत्पन्न हुई हैं। महर्षि पाणिनि द्वारा रचित ‘अष्टाध्यायी' संस्कृत व्याकरण का प्रसिद्ध ग्रंथ है। प्राचीन ग्रंथ आज भी संस्कृत में ही उपलब्ध हैं।
तमिल
यह एक द्रविड़ भाषा है। भारत के अलावा यह श्रीलंका, सिंगापुर और मलेशिया में भी बोली जाती है। तमिल का लगभग 2500 वर्ष का अखण्डित इतिहास लिखित रूप में है। यह भारत की 5 वीं सबसे बड़ी भाषा है। विश्वभर में 5 करोड़ से अधिक लोग तमिल बोलते हैं। तमिल का साहित्य द्रविड़ भाषाओं में सबसे पुराना है।
अरबी
अरबी को विश्व की पांचवी सबसे अधिक बाेली जाने वाली भाषा माना जाता है। यह भाषा अरब प्रायद्वीप में फली-फूली तथा आज यह उत्तरी अफ्रीका, अरब और मध्य पूर्व देशों में बोली जाती है। इस्लामिक धर्मग्रंथ कुरान अरबी में लिखा गया है। मध्यकाल के दौरान धार्मिक अध्ययनों में अरबी का व्यापक प्रयोग हुआ है इसलिए समय के साथ यह बहुत प्रचलित होती गई।
चीनी
इस भाषा के लिखित प्रमाण शांग साम्राज्य (1766 ईपू-1123 ईपू ) के शिलालेखों में मिलते है। दरअसल, ‘चीनी' एक भाषा नहीं बल्कि भिन्न भाषाओं का एक समूह है। इस समूह की मंदारिन भाषा विश्व में सबसे अधिक क़रीब 120 करोड़ से अधिक लोगों द्वारा बोली जाती है। चीनी लिपि भारत और यूरोप की लिपि से भिन्न है।